हौसले की उड़ान डॉ. जया नरगिस को संगीत में भी महारत हासिल, दो दर्जन किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

  • दिव्यांग जया को कविता, उपन्यास व गजल लेखन पर मिले राष्ट्रीय पुरस्कार 

होशंगाबाद. पोलियो की बीमारी से ग्रसित होने के कारण बचपन से ही संघर्षों की शुरुआत हो गई, लेकिन मां का सहयोग और खुद का हौसला ने जीवन का नया रास्ता बनाया। लेखन और संगीत की महारथी  डॉ. जया नरगिस आज भी अकेले ही हालातों का सामना कर रही हैं।

1984 में सर से मां का साया छूटने के बाद जया ने परिवार से दूरी बना ली। अपने जीवन को उन्होंने संगीत व लेखन को समर्पित कर दिया। कविता, उपन्यास, कहानी, गजल और महिलाओं की  समस्याओं को लेकर उन्होंने अब तक 24 से अधिक किताबें लिखी हैं। सभी विषयों पर उत्कृष्ट लेखन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं।

जया ने बताया कि उन्होंने कई मानसिक विकलांग बच्चों को संगीत की शिक्षा दी। जिन्होंने पचमढ़ी उत्सव सहित भोपाल, दिल्ली में सफल कार्यक्रम दिए और पुरस्कृत हुए। जय आकाशवाणी और दूरदर्शन की कलाकार हैं। पिछले एक साल से जया भारत संस्कृति विभाग के प्रोजेक्ट बुंदेली संगीत में कबीरवाणी का समावेश विषय पर म्यूजिक कंपोज कर रही हैं। जिसे रिसर्च के साथ चार साल में तैयार करना है।

डॉ. जया नरगिस ने कई टीवी सीरियल व 250 से अधिक डाक्यूमेंट्री फिल्मों का संगीत तैयार किया। प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर ने उनका लिखा साईं भजन गाया। उन्होंने बताया कि संघर्ष तो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में होता है। लेकिन सत्य के साथ चलने से सफलता और संतुष्टि मिलती है। हाल ही में उनकी किताब ककनू का विमोचन भोपाल में हुआ। जिसमें उन्होंने लिखा है कि ककनू पक्षी जब तक चुप रहता है, सब ठीक रहता है, लेकिन जैसे वह गाने लगता है तो उसका घोंसला जल जाता है। औरत भी ककनू की किस्मत लेकर पैदा हुई है। जब तक वह चुप रहकर सहती है सब ठीक रहता है और जैसे ही जुल्म के खिलाफ आवाज उठाती है तो स्त्री का संसार भी जलकर भस्म हो जाता है।

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