एसईसीएल अधिकारियों की पौ-बारह, करोड़ों की खरीदी में लाखों का कमीसन का खेल

अब्दुल सलाम क़ादरी बीबीसी लाईव (एडिटर इन चीफ)रेट कांट्रेक्ट के अडाप्शन में एसईसीएल अधिकारियों की पौ-बारह, करोड़ों की खरीदी में लाखों का कमीसन का खेल
घोटाले का पर्दाफास-
हसदेव एरिया, जमुनाकोतमा एरिया, शोहागपुर एरिया जोहिला एरिया चिरमिरी, बिश्रामपुर भटगांव एरिया, कोरबा-दीपिका गेवरा में अंडर 2 लाख तथा लिमिटेड टेंडर, ओपन टेंडर में अधिकारियों की मिली भगत से चल रहा है लाखो की कमिसन का गोरखधंधा।
जब विजिलेंस हो मेहरबान तो……….?

नियमों को ताक पर रखकर होती है गड़बड़ी-

बिलासपुर. देश की मिनी रत्न कंपनियों में शुमार एसईसीएल कोयला उत्पादन के क्षेत्र में नित नई ऊंचाइयों को छू रही है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर ये एक सशक्त हस्ताक्षर के तौर पर उभरी है। लेकिन कोयला उत्खनन और मशीनों के मेंटनेंस में जिन तौर-तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है, उससे कई सवाल उठ रहे हैं।
अब जरा सामग्रियों की सप्लाई के लिए की जाने वाली रेट कांट्रेक्ट का ही उदाहरण लें। नियमानुसार कोल इंडिया ने कोयला उत्खनन कार्य में लगी सभी सब्सिडियरी को स्वयं के रेट कांट्रेक्ट के अधिकार दिए हैं। इसके तहत उत्खनन कार्य से लेकर मशीनों की मेंटनेंस तक के तमाम कार्य में इस्तेमाल होने वाले सभी सामग्रियों की खरीदी एसईसीएल को स्वयं करना है। लेकिन पिछले कई वर्षों से अधिकारी कंपनियों से मिलीभगत कर अन्य सब्सिडियरी के रेट कांट्रेक्ट को अडाप्ट कराने के खेल में लगे हैं। हालांकि दिखने में ये मामला सीधा-साधा और नियमों का वायलेशन नहीं प्रतीत होता है। लेकिन गहराई में जाने पर अधिकारियों की मिलीभगत और लाखों की लेन-देन से कौन इनकार कर सकता है। अब ये सवाल उठना वाजिब है कि आखिर एसईसीएल स्वयं के रेट कांट्रेक्ट के अधिकार रहते अन्य कंपनियों, मसलन ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के रेट कांट्रेक्ट को किन कारणों से अडाप्ट किया। जब किसी गर्वमेंट या सेमी गर्वनेंट आरगेनाइजेशन में एक फाइल इधर से उधर कराने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं। बाबू तक बिना किसी चढ़ावे के फाइल को हाथ लगाने से परहेज करते हैं, तो एसईसीएल ने किन कारणों से अन्य सबिसडियरी के रेट कांट्रेक्ट को सीधा अडाप्ट कर लिया। इसका सीधा अर्थ है, अधिकारियों का निहित फायदा। ये कोई पहला या इकलौता मामला नहीं है, ऐसे मामलों से भरा है एसईसीएल का इतिहास।

2018 में ईसीएल के रेट कांट्रेक्ट को अडाप्ट कर खरीदे करोड़ों के बेयरिंग-

एसईसीएल में रेट कांट्रेक्ट के अडाप्शन का सिलसिला वर्षों पुराना है और ये सिलसिला आज भी जारी है। इसकी आड़ में होता ये है कि जिन कंपनियों ने किसी कारण से टेंडर में भाग नहीं लिया, या टेंडर की शर्तों को पूरा करने में यहां कामयाब नहीं हो पाए। वे अधिकारियों से मिलीभगत कर कोल इंडिया की किसी अन्य सब्सिडियरी के रेट कांट्रेक्ट को अडाप्ट करा करोड़ों के आर्डर निकालने में कामयाब हो जाते हैं। सारा खेल नियमों को ढाल बना कर किया जाता है। अधिकांश मामलों की जानकारी तो शीर्ष संस्था कोल इंडिया लिमिटेड को भी नहीं होती। एक उदाहरण देखें, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (धनबाद) ने कई वर्ष पूर्व बेयरिंंग की सप्लाई के लिए टाटा टिमकेन से अनुबंध किया। इसका स्टाकिस्ट धनबाद के किसी वलीराम तनेजा माइंस प्राइवेट लिमिटेड के पास था। टाटा टिमकेन और वलीराम तनेजा माइंस के अधिकारियों ने एसईसीएल के परचेज और एक्सवेशन डिपार्टमेटं के शीर्ष अधिकारियों से सांठगांठ कर रेट कांट्रेक्ट को यहां अडाप्ट करवाकर करोड़ों के बेयरिंग बेच डाले। एक व्हील मोटर बेयरिंग की कीमत 2 लाख रुपए थी और सैकड़ों बेयरिंग एसईसीएल ने खरीद डाले। जबकि कोल इंडिया ने सभी सामग्रियों की खरीदी का स्टैंडर्ड तरीका, रेट कांट्रेक्ट या डिपो एग्रीमेंट तय किया है। डिपो इंचार्ज भी कमिसन खोरी में पूरी तरह सक्रिय है।यही कारण है कि नीति निर्धारक सीआईएल के नियमों की अनदेखी की जा रही है।
यही नही हसदेव एरिया में बिजली सामग्री की खरीदी में तो e and m विभाग ने अति मचा रखी है जिसकी जांच क्या विजिलेंस करेगा जो खुद कमिसन लेकर चलते बनता है क्या यही है मोदी का करप्सन फ्री इंडिया- बिल्कुल नही, करप्सन अपनी हदें पार कर चुका है, 10 की सामग्री को सीधे 50 से 100 में खरीदी जा रही है, ना ही फर्म का कोई शॉप या रिपेयरिंग वर्क शॉप है ना ही कोई प्रतिष्ठान। ऐसे में इस प्रकार के फर्मो को अवैध घोषित कर बैन करने की कार्यवाही होनी चाहिए और अधिकारियो को बर्खास्त करने की भी कार्यवाही होनी चाहिए।

क्रमशः जारी अगली कड़ी में पूरी डिटेल…….

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