मुख्यमंत्री क्या दूर कर पायेंगे कांग्रेस में फैली गूटबाजी-लोकसभा चुनाव 2019

बीबीसी लाईव/खबर 30 दिन-

प्रतीक मिश्रा
शहडोल । लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख नजदीक आते आते राजनीतिक गतिविधियां चरम पर आती जा रही हैं। कांग्रेस में कार्यकर्ताओं के बिखराव के बीच दबाव की राजनीति और निष्क्रिय लोगों पर नकेल नहीं कस पा रही है तो उपेक्षा और संगठन के प्रति नाराजी के चलते पूरे क्षेत्र में असंतोष पनप रहा है। अनुशासन का दावा करने वाली पार्टी में फूट और असंतोष इस बार खुलकर नजर आ रहा है। फिलहाल इन परिस्थितियों में भी सभी दलों के उम्मीदवारों का जनसम्पर्क तपती गर्मी में भी जम कर जारी हैं । उधर पार्टियों द्वारा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो चला है। इसी कड़ी में शुक्रवार को नाम वापसी के बाद शहडोल संसदीय क्षेत्र क्र.12 में 13 अभ्यर्थी मैदान में हैं। (जिनमे केशकली पति सूरज कुमार कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इण्डिया, प्रमिला सिंह पति अमरपाल सिंह भारतीय राष्ट्रीय काग्रेस , मोहदल पिता हुलासी बहुजन समाज पार्टी ,हिमाद्री सिंह पति नरेन्द्र सिंह मरावी भारतीय जनता पार्टी , कमला पिता लम्मू भारतीय शक्ति चेतना पार्टी , मीरा सिंह पति नत्थू सिंह छत्तीसगढ़ विकास गंगा राष्ट्रीय पार्टी, लक्ष्यपत सिंह पिता लखन सिंह पीपुल्स पार्टी आफ इण्डिया ( डेमोक्रेटिक ) ,विमल सिंह कोंचें पिता ददन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ,गोकुल पिता देवसिंह निर्दलीय ,झमक लाल पिता डेरिहा कोल निर्दलीय, दुर्गा बाई पति विनोद कुमार निर्दलीय , नारायण सिंह पिता गजराज सिंह निर्दलीय , मन्ना सिंह पिता स्व . मकोड़ सिंह निर्दलीय शामिल है)

प्रमिला सिंह

जिनमें मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में है, दोनों ही दल के प्रत्याशी एक-दूसरे दल के दलबदलू हैं इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम मतदाता भी सोचने को मजबूर हो गया है कि अपना मत किसे दें। शहडोल लोकसभा में भाजपा और कांग्रेस के बाद गोंडवाना और बसपा ने अपनी पहचान बनाई है।. विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज जयसिंहनगर के पूर्व विधायक प्रमिला सिंह को कांग्रेस में शामिल कर लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। जिनका राजनीतिक इतिहास गत 5 वर्ष पहले जयसिंहनगर विधायक रहते हुए कोई खास नहीं रहा, जिससे भाजपा ने इनका टिकट काटा। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद भी कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हुआ है. इसके बावजूद भी पार्टी ने इन पर अपना विश्वास जताते हुए नये चेहरे के रूप में दांव खेला है. यह दांव कितना कारगर साबित होगा यह तो आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा, जहां प्रत्याशी के पास अपनी उपलब्धि बताने के लिए कुछ खास नहीं है, वहीं पूरे लोकसभा में अपरिचित चेहरा भी है.
प्रमिला सिंह की पैठ जयसिंहनगर विधानसभा के साथ आस-पास क्षेत्रों में है किंतु पार्टी का सहयोग रहा तो मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बना सकती हैं। शहडोल संसदीय क्षेत्र में विधानसभा सीटें है जिसमे 3 कांग्रेस के पास हैं, इसके बावजूद भी तीनों विधायकों में अपने बर्चस्व की लड़ाई के लिए एक-दूसरे की टांग खिंचाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिसका नजारा विगत दिनों देखने को मिलाथा। ऐसी स्थिति में जब तीनों विधायक एक नहीं हैं तो पार्टी किसके दम पर लोसभा का चुनाव में फतह की सोच रही है।अंतरकलह को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ आज अनूपपुर मुख्यालय में चुनावी सभा को संबोधित करने आ रहे हैं, जिसके प्रभारी अनुपपुर के विधायक बिसाहूलाल को बनाया गया है.
विधायकों की आपस में बढ़ती दूरियां कार्यकर्ताओं एवं मतदाताओं के लिए शुभ संकेत नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री तीनों विधायकों से चर्चा कर सकते हैं और पार्टी हित में अपने-अपने अहम को दूर रख लोकसभा की तैयारियों की जिम्मेदारियां सौंप सकते हैं कांग्रेस की यह अंतरकलह लोकसभा चुनाव में जनता के बीच क्या संदेश जायेगा यह तो आगामी दिनों में देखने को मिलेगा।

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