अवैध कटाई व आग से सिमट रहे कोरिया के वन

अब्दुल सलाम क़ादरी एडिटर इन चीफ(बीबीसी लाईव)

मनेन्द्रगढ़ कोरिया। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कोरिया जिले में जंगल तेजी से सिमटते जा रहे हैं। अवैध कटाई और आग की मार झेल रहे जंगल पर      औद्योगिकीकरण की दोहरी मार भी पड़ रही है। सिमटतें जंगल का असर अब मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी (कोरिया) की जलवायु पर दिखाई देने लगा है। तेजी से बढ़ता तापमान और बारिश का घटता औसत से पर्यावरण प्रेमियों और जानकारों के माथे पर चिंता की लकीर डाल दी है।

वहीं अब जिले के सबसे ठंडे क्षेत्र व पर्यटन स्थल अमृतधारा में जलवायु परिवर्तन को लेकर चल रही हलचल से भी प्रकृति प्रेमी उद्वेलित हैं। आग और अवैध कटाई से वनों के अस्तित्व की रक्षा करने में वन विभाग की नाकामी से लोगों में नाराजगी है।

जंगल में आग हुए बेकाबू

जिले में गर्मी के दस्तक के साथ ही जंगल में आग का अनावरत सिलसिला भी शुरू हो चुका है। आग से जंगलों को बचाने के सरकारी दावों से अलग जंगल में लगने वाली आग को बुझाना तो दूर वन विभाग को कई दिनों तक इसकी खबर तक नहीं लग पाती। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगाने की पुरानी परंपरा रही है। ग्रामीणों द्वारा जंगल से महुआ बिनने के नाम पर आग लगाया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक जंगल के पत्तों में पेड़ से गिरे महुआ के फूल नहीं दिख पाते। पत्तों को साफ करने के चक्कर में ग्रामीण जंगल में आगजनी करते हैं। इसी प्रकार बरसात के दिनों में जंगल में उगने वाले मशरूम भी जंगलों के अस्तित्व पर भारी पड़ रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा गरमी के दौरान जंगल में राख फैलाने के लिए आगजनी की जाती है ताकि बरसात के दिनों में पत्तों के सड़ने से अधिक से अधिक मशरूम उन्हें मिल सके। जंगल में आग लगाने की परंपरा जंगलों के अस्तित्व पर बहुत भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

अवैध कटाई व तस्करी का फैलता जाल

हरियाली से भरपूर मनेन्द्रगढ़ (कोरिया) जिले के जंगलों में इमारती लकड़ियों के तस्कर भी लगातार भारी पड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा जलाऊ लकड़ी के साथ बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ियों की रोजाना कटाई जाती है। इस अवैध कटाई के दौरान ग्रामीणों द्वारा जंगल के छोटे पेड़ व पौधों को भी काट दिया जाता है। इससे जंगल में पेड़ों की नई पीढ़ी ही नहीं पनप पाती है। इसी तरह मध्यप्रेदश के सीमावर्ती जंगलों में इमारती लकड़ियों के तस्करों का जाल कुछ इस कदर फैला हुआ है कि हरे भरे जंगल रातो-रात मैदान और मिट्टी के टीले में तब्दील होते जा रहे हैं। इलेक्ट्रानिक आरा मशीन समेत हाई तकनीक से लैस तस्करों पर ना तो वन विभाग नकेल कस पा रहा है और ना ही पुलिस प्रशासन। अभी तक सैकड़ो चंदन के पेड़ काटे जा चुके है कार्यवाही शून्य है।

वन विभाग की विफलता –

अवैध कटाई और आग पर काबू पाने में वन विभाग पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। गर्मी से पहले वन विभाग द्वारा जंगल को आग से बचाने के लिए लंबे चौड़े दावे किए जाते हैं। सेटेलाइट निगरानी सिस्टम जैसे हाईटेक व्यवस्था के साथ मैदानी स्तर पर फायर वॉचर की तैनाती और ग्राम वन सुरक्षा समितियों को साधनों से लैस करने का दावा किया जाता है। लेकिन ये सारे सरकारी दावें खोखले साबित हो रहे हैं। जिले में धू धू कर जल रहे जंगल की खबर भी वन विभाग को दो-तीन दिन तक नहीं मिल पा रही है। कोरिया जिले के केल्हारी, मनेन्द्रगढ़, बिहारपुर, कुँआरपुर, बहरासी, जनकपुर सामान्य तथा जनकपुर पार्क, रामगढ़ पार्क सहित, तथा कई किमी के दायरे में स्थित ग्राम पंचायत बरेल बहरासी ग्राम के पहाड़ी इलाके और आसपास के जंगल में 2-3 दिनों से धधक रही आग की जानकारी वन विभाग को नहीं लग पाई है। कुछ ऐसा ही हाल अवैध कटाई का भी है। अवैध कटाई के विरूद्व भी विभाग अब तक बड़ी कार्रवाई करने में असफल साबित हुआ है।

बढ़ रहा है जंगल पर दबाव –

जंगल पर लगातार बढ़ते दबाव का असर भी साफ देखा जा रहा है। खासकर तेजी से बढ़ रहे उद्योग से जंगल की हरियाली उजाड़ हो रही है। जनकपुर को बिजली सप्लाई करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बिछाए जा रहे पावर लाइन के लिए काटे जाने से बड़ी संख्या में पेड़ से जंगल विरान होते जा रहे हैं। इससे जंगलों की हो रही दुर्दशा का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

खाली हाथ और बगैर सुरक्षा के वनकर्मी

जंगल में आग से जूझ रहे वनकर्मियों की अपनी समस्या है। जंगल में तेजी से फैलने वाले आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों के पास ना तो संसाधन है और ना ही सुरक्षा के साधन। आग पर काबू पाने के लिए कर्मचारी लकड़ी, फावड़ा जैसे मामूली संसाधन का उपयोग करते हैं। वन विभाग मनेन्द्रगढ़ के एसडीओ ने बताया कि आग की सूचना पर कर्मचारी मौके पर पहुंच कर पत्ते को हटाने का काम करते है,जिससे आग का फैलाव ना हो सके। लेकिन इस दौरान कर्मचारियों के स्वयं के आग में झुलसने का खतरा बना रहता है। आग बुझाने के दौरान कर्मचारियों के पास ना तो हेलमेट होता है और ना ही फायर प्रूफ कोट व दस्ताने। आग को फैलने से रोकने लिए सीज फायर का उपयोग भी वन विभाग द्वारा नहीं किया जाता है।

समाचार लिखे जाने तक नए पदस्थ हुए डीएफओ साहब मनेंद्रगढ़ से सम्पर्क नही हो सका है।

मनेन्द्रगढ़ में विगत कई सालों से लाखों रुपये पानी की तरह बर्बाद कर दिए सिर्फ आग पर काबू पाने के नाम पर, पर नतीजा हर साल 0 परसेंट ही रहता है। आग की सूचना पर जब रेंजर फोन नही उठाते तो एसडीओ लोगो को फोन लगाया जाता है पर अपने मुख्यालय से नदारत एसडीओ इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि आग से जंगल जल जाए या खत्म ही हो जाये। लेकिन फोन नही उठ सकता है।

”जंगल में आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग के कर्मचारी लगातार जुटे हुए हैं। सूचना मिलने पर वनकर्मी तत्काल मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाने की कोशिश करते हैं।” रेंजर-कुँआरपुर

कॉपीराइट बॉय-बीबीसी लाइव

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