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कोरिया जिले के खोंगापानी नगर पंचायत में चल रहे अवैध शराब और मादक पदार्थों की बिक्री पर प्रशाशन मौन क्यो?

अब्दुल सलाम क़ादरी (एडिटर इन चीफ)

छत्तीसगढ़/कोरिया

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-नगर पंचायत खोंगापानी अवैध दारू और गांजे की बिक्री का जीता जागता उदाहरण और गढ़ बन चुका है। एक ओर जहां कॉलरी कर्मी अवैध दारू और गांजे से बर्बाद हो रहे है वही बड़ी संख्या में युवा गांजे और नशीली पदार्थों में पैसा और मानसिक संतुलन सहित अपनी शेहत खत्म कर रहे है। कुछ हफ़्तों से अवैध शराब और गांजे की बिक्री में इजाफा देखने को मिल रहा है? शायद इनको वर्तमान में खुलकर प्रशासन का सपोर्ट मिल रहा है?

फाइल फोटो
फ़ाइल फ़ोटो

अवैध दारू और गांजा बेचने वालों का नाम तो सब जानते ही होंगे पर खुलकर सामने कोई नही आता। ऐसे लोग समाज के नाम पर कलंक होते है जो अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए दूसरों के जीवन से खिलवाड़ करते है।

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अवैध दारू गांजा नशीली दवाओं का सेवन खोंगापानी नगर पंचायत के लिए कोई नया नही है।  अब यह अवैध कार्य हाई टेक हो चला है लोगो को यह सेवा घर पहुंचा कर मिल रही है। इस सम्बंध में प्रशासन से सम्पर्क करने पर कोई सही तरीके से जवाब देना तो दूर फोन तक उठाने की जहमत नही करते।

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इन अवैध शराब और गांजे के विक्रेताओं से हर महीने पुलिस चढ़ावा चढवाती है आबकारी विभाग हर हफ्ते इनसे हफ्ता वसूलती है सूत्रों के हवाले से खबर आती है कि चढ़ावे में ऊपर तक हिस्सा पहुँचाया जाता है?

गांजा
गांजा

 अवैध घटिया शराब की बिक्री यानी जिसे शुद्ध भाषा मे कच्ची कहा जाता है बिक्री दिनों दिन जोरो पर है। एक अवैध शराब विक्रेता ने कहा कि पुलिस और आबकारी को हम हर महीने 5 से 10 हजार देते है  वही पर पुलिस विभाग का एक नगर सैनिक हमसे हर महीने पैसे की वसूली करता है। नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि उक्त नगर सैनिक विगत कई सालों से यहां पर जमा हुआ है जो वसूली को अंजाम देता है। जिसका संरक्षण आला अधिकारियों की देन है। ऐसे करीब 30 से 50 लोग है जो यह अवैध कार्य करते है।

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गाँजा(फाइल फोटो)

घटिया शराब जिसे आम भाषा और लोकल भाषा मे कच्ची कहा जाता है जिसे यूरिया से मिलाकर बनाया जाता है जिसके पीने से आदमी कुछ साल का मेहमान होता है।

आकड़ो पे नजर दौड़ाई जाए तो कच्ची शराब पीकर दर्जनों लोग मौत के मुंह मे शमा चुके है, पर इससे प्रशासन के नुमाइंदों को कोई फर्क नही पड़ता है। इन नुमाइंदों को सिर्फ महीने में मिलने वाली रिश्व्त होती है। चाहे आम आदमी बर्बाद हो जाये या मर जाये इससे कोई फर्क इनको नही पड़ता है। कच्ची शराब बिकने का एक कारण यह भी है कि यह सरकारी शराब से बेहद सस्ती होती है और आसानी से देर सवेर हर गली कूचों में 10, 20 रुपये से 100 रुपये तक मिल जाती है। यूरिया से बनने के कारण यह काफी स्ट्राँग होती है, जिसके कारण इसकी मांग सालो साल बनी रहती है। कच्ची शराब गरीब वर्ग की पहली पसंद है, लेकिन इस शराब से होने वाले नुकसान से लोग अनजान होने के कारण बेहद आसानी से इसके शिकार बन रहे है।

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फ़ाइल फ़ोटो

लेकिन अवैध शराब और अवैध गांजे में लोग तो बर्बाद हो ही रहे है साथ मे प्रशासन पर बदनुमा दाग लगता नजर आ रहा है? कोरिया जिले के नवनियुक्त पुलिस कप्तान साहब से निवेदन है कि जल्द ही इसपर कोई कार्यवाही करें नही तो लोग इसकी जकड़ में आते जाएंगे और बर्बाद होते जाएंगे।

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