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स्वास्थ्य आधार पर ज़मानत पर बाहर भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के कबड्डी खेलने पर उठे सवाल

भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव विस्फोट मामले में स्वास्थ्य के आधार पर ज़मानत पर बाहर हैं और यह दावा करते हुए कई अदालती सुनवाई में पेश नहीं हुई हैं कि वह गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. ठाकुर वर्तमान में मुंबई की एक अदालत में यूएपीए की कड़ी धाराओं के तहत मुक़दमे का सामना कर रही हैं.

भोपाल: भारतीय जनता पार्टी की भोपाल से सांसद प्रज्ञा ठाकुर एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर कबड्डी खेलती दिखाई दे रही हैं. वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में चिकित्सा के आधार पर जमानत पर जेल से बाहर आईं प्रज्ञा ठाकुर लंबे समय से ह्वीलचेयर तक सीमित थीं.

नवरात्रि उत्सव के दौरान प्रज्ञा ठाकुर के गरबा नृत्य में भाग लेने का एक वीडियो भी सामने आया था, हैं, जिसे लेकर सवाल उठे हैं. आलोचकों का कहना है कि सांसद किसी भी बड़ी बीमारी से पीड़ित नहीं लग रहीं हैं, जैसा कि उन्होंने पहले दावा किया था.

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. वी. श्रीनिवास सहित कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि ठाकुर को चिकित्सा आधार पर व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने से छूट दी गई है, लेकिन वीडियो में सांसद की तबीयत ठीक नजर आ रही है.

श्रीनिवास ने ट्वीट कर सवाल किया, ‘इनकी एनआईए अदालत में अगली पेशी कब है?’

हालांकि, प्रज्ञा की बहन ने कहा कि उनकी (प्रज्ञा) रीढ़ की हड्डी की समस्या उन्हें कभी भी परेशान कर सकती है.

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में प्रज्ञा बुधवार (13 अक्टूबर) को भोपाल स्थित काली मंदिर परिसर में कबड्डी खेलती दिखाई दे रही हैं. एक अन्य वीडियो में वह चल रहे नवरात्रि उत्सव में गरबा नृत्य करती नजर आ रही हैं.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सिंह सलूजा ने ट्विटर पर प्रज्ञा का वीडियो साझा किया और लिखा, ‘कौन झूठा, यह झूठ बोलता है कि हमारी सांसद जी बगैर सहारे के खड़ी नहीं हो सकती हैं, चल नहीं सकती हैं, ह्वीलचेयर पर चलती हैं? वो पूरी तरह स्वस्थ हैं, वो गरबा भी करती हैं, बास्केटबॉल भी खेलती हैं, ढोल पर थिरक भी लेती हैं. ईश्वर उन्हें सदैव स्वस्थ रखे.’

सांसद का बचाव करते हुए उनकी बड़ी बहन उपमा ठाकुर ने फोन पर बताया कि वह रीढ़ की हड्डी के समस्या से पीड़ित हैं.

उन्होंने कहा, ‘आप नहीं जानते कि किस क्षण उसके लिए यह समस्या पैदा कर सकता है. उनकी एल-4 और एल-5 (रीढ़ की हड्डी) विस्थापित होने से उन्हें यह समस्या है क्योंकि एटीएस महाराष्ट्र (जांचकर्ताओं) ने उसे फर्श पर पटक दिया था.’

उपमा ने कहा, ‘जब भी उन्हें ये समस्या होती है तो उनका (उनके शरीर का) निचला हिस्सा बिना किसी संवेदना के रह जाता है. यह तब भी हो सकता है, जब वह बैठती है या किसी वाहन से उतरती है.’

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘भोपाल की सांसद के अलग-अलग चेहरे हैं. कभी वो ह्वीलचेयर पर नजर आती हैं तो कभी गरबा और कबड्डी भी खेलती हैं. उनके कई चेहरे हैं.’

गुप्ता ने सवाल किया, ‘मध्य प्रदेश के लोग जानना चाहते हैं कि उनका कौन सा चेहरा सही है- गरबा या कबड्डी खेलने वाला या ह्वीलचेयर के सहारे चलने वाले का?’

मालूम हो कि 51 वर्षीय भाजपा सांसद मालेगांव विस्फोट मामले में स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर बाहर हैं और उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए निचली अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी. वह लगभग नौ साल तक जेल में रहीं और 2017 में उन्हें जमानत मिल गई थी.

इन वर्षों के दौरान सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने यह दावा करते हुए कई अदालती सुनवाई में पेश नहीं हुई हैं कि वह गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. ठाकुर वर्तमान में मुंबई की एक अदालत में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की कड़ी धाराओं के तहत मुकदमे का सामना कर रही हैं.

प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ दर्ज मामला 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोटों से संबंधित है. इसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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