BBC Live
SCIENCE & TECH टाप न्यूज भ्रष्टाचार मध्यप्रदेष/छत्तीसगढ़ राज्य स्लाईडर

हसदेव एरिया(secl) का वो घोटाला जो फाइलों में ही दब गया? क्या था घोटाला, पढ़े पूरी खबर

अब्दुल सलाम कादरी

बिलासपुर/कोरिया: कोरोना संकट के दौरान साउथ ईस्ट कोल लिमिटेड (SECL) द्वारा बड़ा घोटाला सामने आया था। मामला कोरोना संकट के दौर में जेबे भरने का था। दरअसल एसईसीएल मुख्यालय के अधीन हसदेव क्षेत्र ने लाखों का मेडिकल समान खरीदा था और इन सामानों की कीमत मार्केट में 4 गुना कम था। अर्थात कम की चीजों को अधिक में खरीदा गया था ।एसईसीएल हेड क्वार्टर में कार्यरत अधिकारियों की मिलीभगत होने का अनुमान लगाया जा रहा है।  साथ ही साथ यह जानकारी भी मिली थी कि इन सामानों की खरीदी के लिए एक अधिकारी को जबलपुर भी भेजा गया था।

पूरे देश में फैले कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एसईसीएल हेडक्वार्टर ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को कोरोना वायरस की रोकथाम और बचाव के लिए फंड जारी किए थे और इसी फंड में भागीदारी है हसदेव क्षेत्र।

जारी किए गए इस फंड का उपयोग मेडिकल सामान खरीदने के लिए किया गया था, जिसके बाद हसदेव क्षेत्र के भंडार विभाग में पदस्थ ए के भक्ता ने जबलपुर से 10 से 14 मार्च 2020 के बीच कोरोना रोकथाम के लिए कुछ सामान आपूर्ति के आदेश जारी किए थे इन सामानों में शामिल है – N 90 मास्क, पीपीई किट,सर्जिकल मास्क 3 लेयर, सर्जिकल कैप ,हाइपो क्लोराइड सॉल्यूशन ,थर्मल स्कैनर नॉनकॉन्टैक्ट थर्मामीटर, N -90 मास्क विथ रेस्पिरेटर ,पीपीई किट 80 जीयसम सप्लाई करने कहा गया था।

सप्लाई किए गए सामानों में किसी भी समान का ब्रांड दर्शाया नहीं है अर्थात क्वालिटी का कोई पता नहीं था जिससे ऐसा लगता है कि कमीशन खोरी की गई हो।

मिली जानकारी के मुताबिक मास्क भी डस्ट रोकने वाले सप्लाई किए गए। जबकि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए N- 95 मास्क लगाए जाते हैं अर्थात घोटाला करने के लिए मास्क में फेरबदल की गई थी।

इसके साथ ही खरीदे गए मास्क की कीमत खुले बाजार में लगभग ₹40 के आसपास होती है जिसे ₹290 में खरीदा गया था।

पीपीई किट खरीदने में भी घोटाला किया गया था, मिली जानकारी के मुताबिक खरीदे गए पीपीई किट में किसी तरह की ब्रांड का उल्लेख नहीं है और यह किट छोटे हैं जो डॉक्टरों के शरीर में फिट हो पाना मुश्किल है ना ही इन किट में किसी तरह की लेमिनेशन और पैकिंग अच्छी तरह से हुई है।

हसदेव क्षेत्र में सैनिटाइजिंग करने के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट खरीदा जो बड़ी मात्रा में 180 रुपए प्रति लीटर में खरीदा गया है जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 40 से ₹50 रुपए है खरीदे गए सर सैनिटाइजिंग की बात की जाए तो 3500 के सामान को ₹8000 में खरीदा गया था।

यह था पूरा मामला परन्तु इसकी जांच हुई भी और नही भी मामला फाइलों में दबकर रह गया। अब वर्तमान में इसकी जांच के लिए हमने हाईकोर्ट का रुख किया है ताकि सम्बंधित नोटशीट और आदेश में हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों को सजा मिल सके।

ज्ञात हो कि जब भी इस तरह का कोई मामला आता है तो मामले को दबाने के लिए अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है।

अगली खबर हसदेव एरिया के सिविल विभाग से सम्बंधित है-जल्द ही इसका प्रकाशन किया जाएगा

Related posts

6 माह से व्याप्त विद्युत समस्या के सुधार की ओर विभाग ने नही दिया खास ध्यान, अब गांव के दर्जन भर युवा वर्ग खुद जुट गए सुधार कार्य मे, जान जोखिम में डाल कर रहे है काम

BBC Live

लॉकडाउन से किसानों पर मार, खेतों में सड़ने लगे टमाटर और हरि सब्जी आगे और बुरे हो सकते हैं हालात

BBC Live

खरसिया, भूपदेवपुर और किरोडीमल में लॉकडाउन की व्यवस्था देखने पहुंचे एसपी

BBC Live

एक टिप्पणी छोड़ें

Translate »
error: Content is protected !!