February 10, 2026 2:48 pm

मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में करोड़ों के घोटाले का आरोप — मनीष कश्यप पर मद परिवर्तन कर समितियों के खातों से रकम निकालने का सनसनीखेज खुलासा

रिपोर्ट | विशेष संवाददाता

मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग से जुड़े कार्यों में मनीष कश्यप द्वारा सरकारी मदों को बदलकर समितियों के खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई और बाद में समिति सचिवों के माध्यम से उसी राशि की नकद निकासी कर वापस ले ली गई। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब सोशल ऑडिट टीम और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को शिकायत भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

कैसे हुआ कथित घोटाला?

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वन विकास से जुड़े कार्यों के लिए जारी शासकीय राशि को नियमानुसार संबंधित कार्यों में खर्च होना था। लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में:

  • स्वीकृत मद को बदलकर राशि विभिन्न समितियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई,
  • इसके बाद समिति सचिवों के माध्यम से वही रकम नकद में निकाल ली गई,
  • और वास्तविक विकास कार्य या तो अधूरे रहे या जमीन पर दिखाई ही नहीं दिए।

सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया कई वित्तीय वर्षों तक चली और इसमें लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है।

दस्तावेजी साक्ष्यों का दावा

शिकायत में बैंक स्टेटमेंट, भुगतान वाउचर, कार्य स्वीकृति आदेश और कुछ समितियों की बैठक पुस्तिकाओं का हवाला दिया गया है। आरोप है कि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण होने की प्रविष्टियां दर्ज हैं, लेकिन मौके पर निरीक्षण में कार्य अस्तित्व में नहीं पाए गए या बेहद निम्न स्तर के मिले।

EOW से जांच की मांग। ऑडिट दस्तावेज गायब

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने सोशल ऑडिट कराए जाने के साथ-साथ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है, जिसमें अधिकारी, समिति पदाधिकारी और अन्य बिचौलियों की भूमिका सामने आ सकती है।

वन विभाग की चुप्पी

इस पूरे मामले पर अभी तक वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में इस खुलासे को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि वन क्षेत्र विकास और आजीविका सुधार के नाम पर आने वाली राशि यदि इस तरह गबन होती रही तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे बल्कि वास्तविक लाभार्थियों का भी हक मारा जाएगा।

राजनीतिक हलचल तेज

मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे बड़े स्तर का संगठित घोटाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं सत्तापक्ष के कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच का समर्थन करते हुए कहा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

अब आगे क्या?

सूत्रों के अनुसार, सोशल ऑडिट रिपोर्ट और EOW की प्रारंभिक जांच के आधार पर जल्द ही प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला वन विभाग के इतिहास के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल हो सकता है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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