अब्दुल सलाम क़ादरी
राजनगर ओपनकास्ट माइंस (ओसीएम) में कोयले के काले कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। लगातार सामने आ रही रिपोर्टों ने कोल इंडिया प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार राजनगर ओसीएम में हजारो टन कोयला शॉर्ट है। यानी खदान से निकला कोयला कागज़ों में तो दर्ज है, लेकिन ज़मीन पर उसका कोई अता-पता नहीं है।
बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में अवैध रूप से ट्रकों में कोयला लोड कर बाहर भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क ओसीएम के अंदर बैठे कुछ अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है। विभागीय जांच के आदेश तो दिए गए, लेकिन कार्रवाई अब तक ठंडे बस्ते में है।
इसी बीच दूसरी बड़ी खबर सामने आई है कि रोड सेल में प्रभारी सिंह का जलवा कायम है। कोयला माफियाओं को खुला संरक्षण मिल रहा है और कोयले की बिक्री में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की जा रही हैं। बताया जाता है कि सिंह की देखरेख में कोयला बिना अनुमति के रोड सेल से बाहर भेजा जा रहा है। हाल ही में सिंह को इसी गड़बड़ी में पकड़ा गया था, लेकिन कुछ ही घंटों में मामला रफा-दफा कर दिया गया। इससे साफ है कि प्रशासन के ऊंचे पदों तक इस पूरे खेल की जानकारी है, मगर जानबूझकर सब आंख मूंदे बैठे हैं।
तीसरी रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेयर और मैनेजर की मिलीभगत से हैंडलोडिंग का खेल भी चल रहा है। यह पूरी तरह नियम विरुद्ध है, लेकिन मजदूरों से जबरन कोयला ट्रकों में भरा जा रहा है। खदान में हैंडलोडिंग से कोल इंडिया को भारी आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है, जबकि संबंधित अधिकारी और ठेकेदार मोटी रकम वसूल कर अपनी जेब भर रहे हैं। वाहन मालिकों से मनमाना पैसा वसूला जा रहा है — जो भुगतान नहीं करता, उसका ट्रक घंटों तक रोक दिया जाता है।
इतना ही नहीं, चौथे खुलासे ने भ्रष्टाचार की जड़ को उजागर कर दिया है। रोड सेल में रिश्वतखोरी का खेल खुलेआम चल रहा है। हर ट्रक से ₹3000 से ₹3500 तक की वसूली तय है। जो वाहन मालिक यह रकम चुका देते हैं, उन्हें तुरंत लोडिंग की सुविधा मिलती है, जबकि बाकी को लाइन में लगाकर परेशान किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि इस वसूली में कॉलरी के कई कर्मचारी और अधिकारी सीधे शामिल हैं।
कुल मिलाकर राजनगर ओसीएम अब “कोयला माफियाओं का अड्डा” बन चुका है। जहाँ नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, और कोल इंडिया को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 12 हजार टन कोयले की कमी, रोड सेल में खुलेआम भ्रष्टाचार, और अधिकारियों की मिलीभगत — ये सब इस बात का सबूत हैं कि यहां बिना संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं।
फिलहाल कोल इंडिया के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लेकिन सवाल अब भी वही है —
क्या कार्रवाई होगी या फिर राजनगर ओसीएम का यह “काला कोयला घोटाला” फाइलों में दब जाएगा?
“इस संबंध में शनिवार को सब एरिया महोदय से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। बाद में ‘Can you call back later?’ लिखकर संदेश भेजा गया।”





















