महराजगंज, बीबीसी लाइव
रमज़ानुल मुबारक की पवित्र 21वीं रात को ग्राम सभा पकड़ी खुर्द स्थित सुन्नी मदीना जामा मस्जिद में तरावीह के दौरान कुरआने पाक मुकम्मल किया गया। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे और श्रद्धा के साथ इस मुकद्दस मौके का हिस्सा बने। मस्जिद में हाफिज शाहिद अली ने तरावीह की नमाज़ में कुरआन शरीफ पूरा सुनाया, जिसके बाद उपस्थित लोगों ने खत्म-ए-कुरआन की खुशी में उनकी हौसला अफज़ाई की और फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया।
मौलाना रमज़ान अमजदी का प्रेरणादायक बयान
तरावीह के बाद मस्जिद के खतीब व इमाम मौलाना मोहम्मद रमजान अमजदी ने नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरआने पाक अल्लाह तआला की आखिरी किताब है, जिसे उसके आखिरी नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) पर उतारा गया है। यह किताब तमाम इंसानों के लिए हिदायत और रहमत है। मौलाना ने कहा कि अल्लाह तआला ने खुद इसकी हिफाजत का जिम्मा लिया है, इसलिए कुरआन शरीफ कयामत तक महफूज़ रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग कुरआन की तिलावत करते हैं, उस पर अमल करते हैं और अपनी जिंदगी को इसके मुताबिक ढालते हैं, अल्लाह तआला उन्हें दुनिया में भी बुलंद करता है और आखिरत में भी उन्हें जन्नत का इनाम देगा। वहीं, जो लोग कुरआन की तालीम से दूर रहते हैं और अपनी मनमर्जी से जिंदगी गुजारते हैं, वे अपनी दुनिया और आखिरत को खुद ही तबाह कर लेते हैं।
मौलाना अमजदी ने हदीस शरीफ का हवाला देते हुए कहा कि कयामत के दिन रमज़ान और कुरआन दोनों इंसान के लिए शफाअत (सिफारिश) करेंगे। यानी जो व्यक्ति रमज़ान का एहतराम करता है और कुरआन की तिलावत करता है, उसके गुनाहों की माफी के लिए ये दोनों अल्लाह से सिफारिश करेंगे। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह कुरआन की तालीम हासिल करे, इसकी तिलावत करे और इसे अपनी जिंदगी में अपनाए।
खत्म-ए-कुरआन पर उत्साह और सम्मान समारोह
खत्म-ए-कुरआन के इस खास मौके पर उपस्थित लोगों ने हाफिज शाहिद अली की मेहनत और लगन की सराहना की। उन्हें फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया और दुआओं से नवाजा गया। इस अवसर पर मस्जिद कमेटी और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी खुशी का इज़हार किया और हाफिज साहब को मुबारकबाद दी।
ग्राम सभा के सम्मानित लोग हुए शामिल
इस खास मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिनमें निज़ामुद्दीन खान, बदरुद्दोजा, डॉ. अयूब अली, सदरुल हक, हाजी आरिफ अली, निमतुल्लाह, सलामुद्दीन, खालिद हसन, बदरे आलम, अब्दुल हसन, जाने आलम, इमामुद्दीन खान, हाफिज जसरार अहमद, मौलाना आमिर अमजदी, हाफिज इकरार अहमद, मौलाना फरहान रज़ा, नूर आज़म, शाहरे आलम, बदरुद्दीन, दानिश राजा, सुहेल अहमद, ग्राम प्रधान एजाजुद्दीन, मोहसिन रज़ा, जविउल्ला, हकीकुल्लाह, मोहम्मद इस्लाम, सिराज अहमद, साहब अली, आरिफ अली, अब्दुल हफीज, रिज़वान, असरार अहमद, मुबारक अली, अली रज़ा, ओबेदुल्लाह, जमीर आलम, कमरे आलम, सलमान, सज्जाद, नूर लाइन, अवसान, इज़हार अली, बिस्मिल्लाह, रियाज़ अहमद, एकराम हसन, मौलाना मिस्बाह रज़ा, अकरम सहित दर्जनों लोग शामिल हुए।
दुआओं का एहतमाम और सामूहिक प्रार्थना
खत्म-ए-कुरआन के बाद सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर दुआ मांगी। इस मौके पर अल्लाह तआला से मुल्क की खुशहाली, अमन-चैन, भाईचारे की सलामती और तमाम मुसलमानों के लिए दुआएं की गईं। खासतौर पर रोज़ेदारों के लिए मगफिरत की दुआ मांगी गई और इस बात का संकल्प लिया गया कि सभी लोग कुरआन की तालीम को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएंगे।
समाप्ति
यह मुकद्दस महफिल देर रात तक जारी रही और आखिर में तबर्रुक (प्रसाद) का भी एहतमाम किया गया। इस पूरी महफिल में हर तरफ रूहानियत और ईमान की रोशनी फैली रही। यह रमज़ान की उन खास रातों में से एक थी, जो अल्लाह की रहमत से भरी होती हैं और जिनका एहतराम हर मुसलमान के लिए जरूरी है।
हमारे संवाददाता मौलाना समीम हासमी से बात करते हुए मौलाना रमज़ान अमजदी ने इस पूरे आयोजन की जानकारी दी और सभी को कुरआन की तालीम पर अमल करने की नसीहत की।