अब्दुल सलाम क़ादरी
विशेष रिपोर्ट | ग्राउंड जीरो से खुलासा
घुटरीटोला क्षेत्र में खुलेआम दर्जनों अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जिन पर न तो पर्यावरण की चिंता है, न खनिज नियमों की परवाह और न ही जनता की सुरक्षा की फिक्र। हैरानी की बात यह है कि ये भट्ठे ओपनकास्ट माइंस के डेंजर जोन और राष्ट्रीय राजमार्ग से महज कुछ दूरी पर संचालित हो रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इन अवैध ईंट भट्ठों से खनिज विभाग और राजस्व विभाग द्वारा हर महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली की जाती है। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार महज कुछ हजार रुपये का जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है और भट्ठा संचालकों को खुला संरक्षण दे दिया जाता है।
पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियां
इन भट्ठों से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के गांवों की हवा, खेतों और जल स्रोतों को दूषित कर रहा है। न तो इनके पास पर्यावरण स्वीकृति (EC) है, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति, फिर भी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
खनिज रॉयल्टी की आड़ में अवैध वसूली
स्थानीय भट्ठा संचालकों का कहना है कि:
“हर महीने मोटी रकम अधिकारियों को देनी पड़ती है, नहीं तो कार्रवाई की धमकी मिलती है। लेकिन कार्रवाई होती भी है तो सिर्फ दिखावे की।”
यह सीधा संकेत देता है कि यह मामला सिर्फ अवैध कारोबार का नहीं बल्कि संगठित प्रशासनिक संरक्षण और भ्रष्ट तंत्र का है।
डेंजर जोन में भट्ठे — बड़ा हादसा तय?
ओपनकास्ट माइंस क्षेत्र में जमीन धंसने का खतरा बना रहता है, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे इन भट्ठों के कारण आगजनी, धुएं से दुर्घटनाएं और संरचनात्मक जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं — लेकिन न तो खनिज विभाग चेता, न ही जिला प्रशासन।
अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप
खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों से बातचीत में खुद स्वीकारोक्ति सामने आई कि इन भट्ठों को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। वहीं आरोप है कि कलेक्टर कार्यालय पूरी तरह मौन है, जिससे भ्रष्ट तंत्र को खुली छूट मिल रही है।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?
- खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बिना अनुमति खनन अपराध है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बिना स्वीकृति प्रदूषणकारी गतिविधियां दंडनीय हैं।
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ईंट भट्ठों के संचालन हेतु कड़े मानक तय किए हैं।
इसके बावजूद घुटरीटोला में कानून को खुलेआम रौंदा जा रहा है।
जनता पूछ रही है — कब टूटेगा यह भ्रष्ट गठजोड़?
- स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
- सभी अवैध ईंट भट्ठों को तत्काल सील किया जाए
- वसूली में शामिल अधिकारियों पर FIR दर्ज हो
- पर्यावरण क्षति का आंकलन कर जुर्माना वसूला जाए
- पूरे मामले की जांच कराई जाए
घुटरीटोला में अवैध ईंट भट्ठे सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार, पर्यावरण विनाश और जन सुरक्षा से खिलवाड़ का बड़ा उदाहरण बन चुके हैं। सवाल यह नहीं कि सब कुछ पता है या नहीं — सवाल यह है कि कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?






















