नई दिल्ली
भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पदभार संभाला।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जे.पी. नड्डा मौजूद हैं।भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। मंगलवार को औपचारिक रूप से नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ। नए अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम वरिष्ठ नेता, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ लोग शामिल हुए । खास बात यह भी है कि भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है।
भाजपा के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है। आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं। 23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से उन्होंने सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है।
राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई। उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे। पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई।पिता के निधन के बाद 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार सदन पहुंचे। परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक जमीन और मजबूत हुई। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने।
बिहार विधानसभा में वे उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है।बिहार की एनडीए सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है। हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में दिखी। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में पहचान बनी तो पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपीं।
सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के तौर पर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली।छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है। जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया। संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की।संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया।
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