बीबीसी लाईव
रायपुर/मनेन्द्रगढ़। झगराखण्ड नगर पंचायत से आवेदक अब्दुल सलाम कादरी ने 2019 में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दस्तावेज की मांग की थी। जन सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी नही देने पर प्रथम अपील सीएमओ नगर पंचायत के समक्ष किया था।

सीएमओ प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा प्रथम अपील को नही सुना गया ना ही जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसके फलस्वरूप अपीलार्थी द्वारा राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया, मामला राज्य सूचना आयोग में दर्ज हुआ, और फिर 5 साल की कड़ी मशक्कत के बाद आयोग ने पाया कि जन सूचना अधिकारी ने जानकारी देने में कोताही बरती है फलस्वरूप आयोग में 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए जानकारी देने के लिए आदेश किया।
राज्य सूचना आयोग 7 दिवस में जानकारी देने के आदेश के बावजूद नगर पंचायत झगराखण्ड द्वारा आज दिनाँक तक जानकारी नही दी गई है , अपीलार्थी ने आयोग के समक्ष आज दिनांक 01/08/2024 को धारा 18(1) के तहत मामला प्रस्तुत करते हुए सीएमओ नगर पंचायत झगराखण्ड और इंजीनियर नगर पंचायत के विरुद्ध धारा 20 (2) के अनुसार कार्यवाही करने की मांग की गई है।
धारा 20(2) के तहत सूचना नहीं देने वाले या गलत सूचना देने वाले अधिकारी/कर्मचारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने का अधिकार भी राज्य सूचना आयोग के पास ही है। और राज्य सूचना आयोग इस मामले में कार्यवाही करेगी।
देखने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में राज्य सूचना आयोग के आदेश का पालन ही नही किया जा रहा है, जो गम्भीर चिंता का विषय बन रहा है, और लोगो का इस कानून से भरोसा उठता जा रहा है।