जगदलपुर: बस्तर में नक्सलवाद अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। नक्सलियों के दबाव में ग्रामीणों ने अब बदलाव का समर्थन करना शुरू कर दिया है। कुछ माह पहले, सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में नक्सल कमांडर हिड़मा और देवा बारसे के घर को ग्रामीणों ने तोड़ दिया और उनके परिवार को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। यह घटना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण अब नक्सलियों से दूरी बनाकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
सुकमा जिले के पूवर्ती और आसपास के क्षेत्रों में ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत सरकार ने जो बदलाव लाए हैं, उनका असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। हिड़मा और देवा के गांव में इस वर्ष फरवरी में सुरक्षा बलों का कैंप खोला गया था। बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर स्थित यह क्षेत्र चार दशकों तक नक्सल हिंसा का केंद्र रहा था। सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान नक्सलियों ने ग्रामीणों को बंदूक थमाई थी और खुलेआम प्रशिक्षण शिविर चलाए थे। हिड़मा को सेंट्रल कमेटी सदस्य बनाने के बाद बटालियन का प्रभारी बना दिया गया था, और बाद में देवा को कमांडर के रूप में तैनात किया गया था।
हालांकि, अब ग्रामीणों का नक्सलवाद से मोह भंग होने लगा है। पूवर्ती के भीमा माड़वी ने बताया कि नक्सलियों ने पहले गांववालों के मन में यह बात भर दी थी कि सुरक्षा बल और सरकार दुश्मन हैं, लेकिन जब गांव में सुरक्षा बल का कैंप खुला तो ग्रामीण डर के बजाय बदलाव की ओर कदम बढ़ाने लगे। इस बदलाव का परिणाम यह हुआ कि गांव में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी खोल दिए गए, जिससे ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हुआ।
पढ़ाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की तरफ बढ़ता यह कदम नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा संदेश बन गया है। देवा बारसे के गांव ओईपारा में भी विकास कार्यों की मांग उठ रही है, हालांकि वहां अभी तक विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि पूवर्ती के विकास को देखकर अब वे भी अपने गांव में वही बदलाव चाहते हैं।
सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि डबल इंजन की सरकार ने ‘नियद नेल्लार’ योजना से गांवों में विकास कार्यों को गति दी है। इस योजना के तहत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे नक्सलियों का डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।