बिलासपुर। डीपीआई ने महिला व्याख्याता को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि महिला व्याख्याता रंजना शर्मा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान बच्चों को नकल करा रही थी। पूरा मामला बिलासपुर का है, जहां उड़नदस्ता दल में शामिल 36 अधिकारी लगातार जांच कर रही थी। इसी दौरान विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें किसी भी छात्र को नकल करते हुए नहीं पाया। एक महिला लेक्चरर को नकल कराते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद DPI ने उसे निलंबित कर दिया।
नकल रोकने के लिए किए गए सख्त इंतजाम
बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इस बार माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सख्त निर्देश जारी किए थे। जिला शिक्षा अधिकारी को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि परीक्षा केंद्रों पर नकल न हो। इसी के तहत 6 उड़नदस्ता दल बनाए गए, जिनमें प्रत्येक दल में 6 अधिकारी नियुक्त किए गए। इन दलों को पूरे जिले में परीक्षा केंद्रों पर औचक निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
महिला लेक्चरर नकल कराते रंगे हाथों पकड़ी गई
17 मार्च को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के अधिकारियों ने जिले के विभिन्न स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। उसी दिन 10वीं बोर्ड की सामाजिक अध्ययन परीक्षा चल रही थी। जब अधिकारी तखतपुर विकासखंड के उसलापुर स्थित गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे, तो उन्हें कक्ष क्रमांक 5 में ड्यूटी पर तैनात लेक्चरर रंजना शर्मा छात्रों को प्रिंटेड नकल सामग्री बांटते हुए मिली। अधिकारियों ने मौके पर ही साक्ष्य एकत्र किए और इसकी रिपोर्ट DPI को भेजी।
महिला लेक्चरर को किया गया निलंबित
नकल कराते पकड़े जाने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक दिव्या उमेश मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 28 मार्च को आदेश जारी कर लेक्चरर रंजना शर्मा को निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया कि उनका यह कृत्य उनके पदीय दायित्वों के विरुद्ध है और यह अनुशासनहीनता के साथ-साथ लापरवाही भी है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।
अधिकारियों की कड़ी निगरानी के बावजूद छात्रों की नकल नहीं मिली
बिलासपुर जिले में गठित 6 उड़नदस्ता दलों को परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से किसी भी दल को एक भी नकलची छात्र नहीं मिला। हालांकि, महिला लेक्चरर को नकल कराते हुए पकड़े जाने से साफ है कि परीक्षा में नकल को रोकने के लिए कड़े प्रयासों के बावजूद शिक्षकों द्वारा अनुचित साधनों का सहारा लिया जा रहा है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है और प्रशासन को और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत को दर्शाती है।