राज्य

राज्य के वन विभाग में नया चमत्कार देखने को मिला!

 

लोग आश लगाए बैठे रह गए कि कब मुख्य वन संरक्षक वनमंडलाधिकारी,परिक्षेत्र अधिकारियो का स्थानातंरण होगा।

लेकिन यहाँ खोदा पहांड और निकली चुहिया!

अब्दुल सलाम कादरी

रायपुर/छत्तीसगढ़ से मामला वन विभाग से आ रहा है वन विभाग तो वैसे ही आजकल राज्य में शुर्खियो में है,क्योंकि वन विभाग के मुखिया से आशय प्रधान मुख्य संरक्षक से है जिनको अभी तक विश्वास नही हो रहा है कि राज्य में कांग्रेस सरकार नही बनी है उनको तो लगता है कि कैसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आ गई क्योंकि कांग्रेस की सरकार जाने से उनके अरमानो में पानी फिर गया उनके द्वारा बहुत सारे सपने देखे गये थे उन देखे गये सपनो में पानी फिर गया अभी हाल में बहु चर्चित वेब पोर्टलों में उनकी कुछ खबरे चल रही थी जो उनके द्वारा नुयक्ति की गई थी जिसमे वरिष्ठ अधिकारियों की ताजपोशी की जगह उनके निचले स्तर वाले अधिकारियों की ताजपोशी कर दी गई थी जो नियम विरुद्ध था जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ जन- प्रतिनिधियों ने उस मुद्दे को बहुत ही तीब्रता से उठाया था लेकिन क्या करे वह मुद्दा भी 150 की तीब्रता में चलती गांड़ी तरह पंचर होता दिख रहा था! लेकिन क्या करे गांडी का पंचर बन गया और कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बन गया था, मामला ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गांड़ी का टायर ही बदलने की कगार में था!लेकिन मामला एक शांत होता गया और सुस्त हो गया ! वन विभाग के बड़े- बड़े लोग बड़ी बड़ी बाते चलिए हम मुद्दे में आते है अभी हाल में वन विभाग के कुछ कर्मचारियों का आनन फानन में स्थानांतरण किया गया है जिसमे 3 कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया! क्या बात है ये कोई चमत्कार कम नही सिर्फ 3 कर्मचारियों का ही स्थानान्तरण किया गया! ऐसी क्या बात हो गई कि वो भी सिर्फ 3 कर्मचारियों का ही स्थिनानंतरण किया गया ,एक तो नीम ऊपर से करेला चढ़ा स्थानांतरण पत्र में अनमोदन तो देखिए प्रदेश के मुखियों जी को करना पड़ गया अब सोचने योग्य बात यह है कि लोकसभा चुनाव के सिर्फ कुछ दिन ही बचे है लेकिन अभी तक विभाग के उच्च अधिकारियों के स्थानांतरण सूची अभी तक जारी नही की गई है क्योंकि ज्यादातर राज्य के मुख्य वनसंरक्षक कार्यालय , वनमंडल कार्यालयों ,वनपरिक्षेञ कार्यालयो में 3 वर्षों ऊपर के अधिक अधिकारी अभी भी अपनी पैड फेविकोल की तरह जमा कर बैठे हुए है लोकसभा चुनाव की अभी आचार सहिंता कोई फिक्स नही हुई है कब लागू हो जाये लेकिन विभाग के कानों में जूं रेंगने का नाम नही ले रहा है।इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग चाहता ही नही है कि स्थानांतरण हो। जो जहाँ बैठा है फेविकोल की तरह चिपक के बैठा रहे मलाई खाता रहे और उच्चाधिकारियों को रसमलाई खिलाता रहे ।अभी आगे के अंक में एक और विभाग में उच्च अधिकारी जो तत्कालीन मुख्य वनसंरक्षक पद पर सेवा देने के बाद सेवा निरवर्त हुये जो अपने कार्यकाल में भारी सुर्खियों में रहे जिनकी सेवा अभी अभी कुछ दिनों पहले सेवा समाप्त हुई है उसके बाद भी उनके घर का वन विभाग ठेका लेकर रखा है जिनके घर और परिवार की सेवा में बहुत सारे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी उनके घर का काम करने जाते है और उनको जो विभाग जो सरकारी गांड़ी दिया है उसकी चलाने जाते है ऐसा क्या है उस अधिकारी में क्या वह कोई राजनेता है? या कोई सरकार से सम्मानित महानपुरुष है जिसको विभाग इतनी सुविधा दिए हुए है। बताया जाता वह राज्य एक मंत्री के ससुर है !उनकी पूरी ग्रंथ कहानी अगले अंक में आप सभी के बीच मे रखेंगे।

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