September 25, 2026 4:11 am

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बड़ा बयान, कहा- हमें भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए

सीआईआई (भारतीय उद्योग परिसंघ) द्वारा आयोजित शिखर सम्मलेन में वायुसेना प्रमुख मार्शल एपी सिंह और अन्य शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मेक इन इंडिया और डिजाइन इन इंडिया कार्यक्रमों और अधिक तेजी से आगे बढ़ाने की बात की।

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थिति ने हमें यह एहसास कराया है कि आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है और हमें भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए. अगले 10 वर्षों में वायु सेना को उद्योग से अधिक इनपुट की आवश्यकता होगी. हमें मेक इन इंडिया कार्यक्रमों में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि हम इसके ‘अभी तैयार’ भाग को प्राप्त कर सकें, जबकि ‘डिजाइन इन इंडिया’ निकट भविष्य में प्रगति करना जारी रखे हुए है.

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ये बातें गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2025 में “उद्योग, नवाचार और साझेदारी का दोहन: भारत के रक्षा विजन को पूरा करना” शीर्षक सत्र में अपने संबोधन के दौरान कहीं.

उन्होंने आगे बताया कि कैसे आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है. ऑपरेशन सिंदूर को भविष्य की दिशा और आवश्यकताओं के स्पष्ट संकेतक के रूप में उद्धृत किया. उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों द्वारा भागीदारी के लिए उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) की मंजूरी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह निजी क्षेत्र में सरकार के विश्वास को प्रदर्शित करता है.

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा, “भारत हमेशा से एक समुद्री राष्ट्र रहा है, था और रहेगा – न केवल डिजाइन या भूगोल के हिसाब से, बल्कि हमारे भविष्य के विकास के मामले में नियति के हिसाब से भी. आज, भारत अपनी समृद्ध समुद्री क्षमता को साकार कर रहा है, जिसमें शीर्ष स्तर के निर्णय और नीतियां इस व्यापक समुद्री पुनर्जागरण को दर्शाती हैं.”

बड़े रणनीतिक लक्ष्यों को संबोधित करते हुए, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने उद्योग के विकास में तेजी लाने के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को तेज करने सहित रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के उद्देश्य से सरकार के चल रहे सुधारों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “भारत का रक्षा दृष्टिकोण आंतरिक रूप से आत्मनिर्भरता, रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा विनिर्माण से जीडीपी में विस्तारित योगदान के साथ विकसित भारत की व्यापक आकांक्षा से जुड़ा हुआ है.”

रक्षा विभाग (आरएंडडी) के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने स्वदेशी अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने में निजी उद्योग की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भविष्य के युद्ध में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया, जबकि विनिर्माण महत्वपूर्ण बना हुआ है, ध्यान हमारे अपने सिस्टम को डिजाइन करने और विकसित करने पर भी होना चाहिए. हम निजी उद्योगों को अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने के लिए आमंत्रित करते हैं.

उन्होंने कहा, “डीआरडीओ भारत को रक्षा नवाचार में वैश्विक नेता बनाने के लिए निकटता से साझेदारी और सहयोग करेगा.” इस सत्र में सीआईआई और केपीएमजी इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से तैयार “आत्मनिर्भर, अग्रणी और अतुल्य भारत 2047” नामक एक व्यापक रिपोर्ट का विमोचन भी हुआ. रिपोर्ट में अगले दो दशकों में रक्षा निर्माण, नवाचार और निर्यात में भारत के नेतृत्व को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा दी गई है.

अन्य प्रतिष्ठित पैनलिस्टों में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, उप सेना प्रमुख; राजिंदर सिंह भाटिया, अध्यक्ष, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम); और अरुण रामचंदानी, अध्यक्ष, सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन डिफेंस शामिल थे, जिन्होंने भारत की रक्षा महत्वाकांक्षाओं को साकार करने के लिए आवश्यक सहयोग और नवाचार पर अंतर्दृष्टि प्रदान की.

सीआईआई वार्षिक सत्र के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में “विश्वास का निर्माण – भारत पहले” विषय के तहत रक्षा, नवाचार, स्थिरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और सुरक्षित विकास सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी. एक भरोसेमंद और विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करते हुए, शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सरकार, उद्योग, और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के साथ मिलकर समावेशी और भविष्य के लिए तैयार आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है.

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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