August 16, 2026 4:46 pm

PWD में रिपेयरिंग के नाम पर ‘खेल’! मनेन्द्रगढ़ से बैकुंठपुर-जनकपुर तक करोड़ों की बिलिंग पर उठे सवाल

अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

  • वर्षों से जमे बाबुओं पर भी मेहरबानी? पांच साल के कामों की जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज

मनेन्द्रगढ़/बैकुंठपुर/जनकपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) में सड़क और शासकीय भवनों की मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने को कथित तौर पर बड़ा नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप सामने आए हैं। आरोपों का केंद्र मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर और जनकपुर क्षेत्र के PWD कार्यालय बताए जा रहे हैं, जहां ठेकेदारी व्यवस्था, कार्यों की बिलिंग और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से मरम्मत कार्यों के नाम पर ऐसे काम स्वीकृत और बिल किए जाते रहे हैं, जिनकी वास्तविकता और बिलों में दर्शाई गई मात्रा एवं लागत का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण किया जाए तो कथित अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं। सूत्रों का दावा है कि इंजीनियर, सब-इंजीनियर और SDO स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से कथित तौर पर ‘कागजों पर काम’ और वास्तविक काम के बीच अंतर का खेल चलता रहा है।

सड़क हो या भवन—रिपेयरिंग बनी कमाई का कथित जरिया!

आरोप है कि सड़क रिपेयरिंग, भवन मरम्मत और अन्य रखरखाव कार्यों में ठेकेदारों के बिलों को पास कराने से लेकर कार्यों के सत्यापन तक की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। यदि पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत सभी रिपेयरिंग कार्यों, MB (Measurement Book), तकनीकी स्वीकृति, वर्क ऑर्डर, भुगतान बिल और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाए तो कथित तौर पर बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हो सकता है।

वर्षों से जमे बाबूओं का तबादला क्यों नहीं?

विभागीय व्यवस्था में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ बाबुओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि संवेदनशील शाखाओं में वर्षों से जमे कर्मचारियों के तबादले नहीं होने से कथित तौर पर एक मजबूत ‘सिस्टम’ तैयार हो गया है, जिसमें ठेकेदारों और विभागीय अमले के बीच कामकाज आसानी से चलता रहता है।

अब सवाल यह है कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो वर्षों से जमे कर्मचारियों के स्थानांतरण और संवेदनशील कार्यों की स्वतंत्र जांच से विभाग को आखिर डर किस बात का है?

मंत्री के नाम पर ‘कमीशन’ की चर्चा, सच क्या है?

सबसे गंभीर आरोप स्थानीय मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के नाम को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कथित कमीशन देकर शिकायतों और आरोपों को शांत कराया जाता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मंत्री या उनके कार्यालय का पक्ष इस संबंध में सामने आना बाकी है।

यदि किसी मंत्री के नाम का इस्तेमाल केवल अधिकारियों या ठेकेदारों द्वारा अपना काम निकालने के लिए किया जा रहा है, तो यह भी उतना ही गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अब जांच हुई तो निकलेगा ‘रिपेयरिंग का हिसाब’!

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिछले पांच वर्षों में मनेन्द्रगढ़, बैकुंठपुर और जनकपुर PWD के अंतर्गत हुए सभी मरम्मत कार्यों का थर्ड पार्टी तकनीकी ऑडिट, भुगतान का वित्तीय ऑडिट और मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

  • स्वीकृत राशि और वास्तविक कार्य की लागत में कितना अंतर है?
  • कितने कार्यों की MB में दर्ज मात्रा मौके पर मौजूद है?
  • किन ठेकेदारों को बार-बार काम दिए गए?
  • बिल पास करने और भुगतान की प्रक्रिया में किस-किस अधिकारी की भूमिका रही?
  • वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों का तबादला क्यों नहीं हुआ?
  • क्या किसी कार्य में बिना पर्याप्त काम के भुगतान किया गया?
  • क्या किसी अधिकारी, ठेकेदार या राजनीतिक व्यक्ति ने कमीशन के नाम पर कोई लेन-देन किया?

इन आरोपों की जांच यदि निष्पक्ष एजेंसी अथवा उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट से कराई जाती है, तभी दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। फिलहाल आरोप गंभीर हैं, लेकिन दस्तावेजी जांच और मौके के सत्यापन के बिना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

अब गेंद शासन और PWD के आला अधिकारियों के पाले में है—जांच होगी या ‘रिपेयरिंग का खेल’ इसी तरह चलता रहेगा?

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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