- जिस रेंजर के खिलाफ शिकायत, उसी के अधीन जांच का आरोप; एसडीओ ने भी बिना स्वतंत्र सत्यापन के किया मामला बंद
मरवाही। मरवाही वन परिक्षेत्र में वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक कराए गए निर्माण कार्यों, पौधरोपण, पौधों की खरीदी, परिवहन और मजदूरी भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल 1076 पर दर्ज शिकायत को बिना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के स्पेशल क्लोज किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है।
मामले में शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम कादरी, निवासी खोंगापानी, जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ने 25 सितंबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में मरवाही वन परिक्षेत्र में चार वर्षों के दौरान कराए गए विभिन्न कार्यों और उन पर खर्च की गई शासकीय राशि का वास्तविक कार्यों से मिलान कराने की मांग की गई थी।
जिस रेंजर के खिलाफ शिकायत, उसी पर जांच की जिम्मेदारी?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस वन परिक्षेत्र के रेंजर के खिलाफ शिकायत की गई, उसी रेंजर को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की थी कि जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी या ऐसे जांच दल से कराई जाए, जो संबंधित कार्यों के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में न रहा हो। साथ ही, मौके पर भौतिक सत्यापन, निर्माण कार्यों की वास्तविक माप, पौधों की संख्या और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की गई थी।
एसडीओ की टिप्पणी से भी उठे सवाल
सीएम हेल्पलाइन के उपलब्ध विवरण के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को शिकायत को एल-2 स्तर पर स्पेशल क्लोज किया गया। पोर्टल पर दर्ज अधिकारी की टिप्पणी में कहा गया कि परिक्षेत्र अधिकारी की जांच रिपोर्ट से सहमति है तथा प्रकरण नस्तीबद्ध करने की अनुशंसा की जाती है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उप वनमंडलाधिकारी ने स्वतंत्र जांच और मौके पर सत्यापन कराए बिना ही मामले को बंद कर दिया। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु का अलग-अलग भौतिक सत्यापन किया गया था या नहीं।
शिकायत में उठाए गए थे गंभीर बिंदु
शिकायत में वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक स्वीकृत कार्यों और राशि का वास्तविक कार्यों से मिलान करने की मांग की गई थी। इसमें प्रमुख रूप से निम्न बिंदु शामिल थे:
- निर्माण कार्यों की वास्तविक माप और भुगतान का मिलान।
- पौधरोपण के लिए खरीदे गए तथा वास्तव में लगाए गए पौधों की संख्या का सत्यापन।
- जीवित पौधों की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति की जांच।
- पौधों की खरीदी, परिवहन और मजदूरी भुगतान से संबंधित बिल, मस्टर रोल एवं अन्य अभिलेखों का परीक्षण।
- स्वीकृत बजट और मौके पर कराए गए कार्यों के बीच अंतर की जांच।
शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की थी कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
विभागीय रिपोर्ट में क्या कहा गया?
वन परिक्षेत्र कार्यालय मरवाही की ओर से शिकायत पर प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित वर्षों में स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार कार्य कराए गए और नियमानुसार सत्यापन एवं परीक्षण के बाद भुगतान किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि उच्चाधिकारियों के प्रवास के दौरान कार्यों का निरीक्षण किया गया।
रिपोर्ट में शिकायतकर्ता द्वारा किसी विशिष्ट कार्य, कार्यस्थल या कार्यकाल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किए जाने तथा अनियमितता के संबंध में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने की बात कही गई। इसी आधार पर व्यापक जांच की मांग को उचित नहीं माना गया।
लेकिन सवाल यह है कि जब शिकायत में निर्माण कार्यों, पौधरोपण, सामग्री खरीदी और भुगतान से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया था, तो क्या उन सभी का स्वतंत्र रूप से मौके पर सत्यापन किया गया? क्या शिकायतकर्ता द्वारा मांगे गए अभिलेखों और भौतिक जांच का पूरा विवरण सार्वजनिक किया गया।
सीएम हेल्पलाइन की पारदर्शिता पर सवाल
सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी शिकायत में विभागीय कार्यों की जांच की मांग की जाती है, तो केवल संबंधित विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मामला बंद किए जाने से शिकायत निवारण की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले में स्वतंत्र जांच के बजाय विभागीय रिपोर्ट को ही अंतिम आधार बना लिया गया। उनका सवाल है कि यदि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का मौके पर सत्यापन नहीं हुआ, तो शिकायत को स्पेशल क्लोज करने का आधार क्या रहा?
अब देखना होगा कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग पर क्या कदम उठाते हैं। साथ ही, सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब किस प्रकार दिया जाता है।
अब मामला पहुँचेगा हाईकोर्ट , सम्बंधित जांच अधिकारी को जल्द मिलेगा हाईकोर्ट का नोटिस….क्योकि पूर्व में भी दर्जनों शिकायत है जो इन जैसे भर्स्ट अधिकारियों को बचाने का कार्य किया गया है। खबर के सम्बंध रेंजर को फोन करने पर फोन नही उठाया गया। रेंजर और sdo की जुगलबंदी अब जगजाहिर हो गई है, वही सूत्रों ने बताया कि sdo बच्चन का कहना है कि डरने की जरूरत नही है ऊपर तक मामला सेट है? अब ये ऊपर में किस्से मामला सेट करके बैठे है कितने परसेंट में सेट करके बैठे है ये जांच का विषय है इसी कड़ी में अगला अपडेट 5/11/25 को प्रसारित किया जाएगा। मामले में dfo श्री निशांत की प्रतिक्रिया आनी बाकी है। मतवाही रेंज में एक एक कार्य की पड़ताल और उसकी विस्तार पूर्वक खबर प्रकाशित की जाएगी।






















