September 30, 2026 4:26 pm

कोतमा वन परिक्षेत्र में CAMPA कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, मजदूरी भुगतान विवाद से लेकर वन्यजीव और अवैध उत्खनन तक—शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग

अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

भोपाल। अनूपपुर। अनूपपुर वनमंडल के कोतमा वन परिक्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से कराए जा रहे वानिकी एवं अन्य कार्यों को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। अब CAMPA मद में कराए गए कार्यों, मजदूरी भुगतान, वन्यजीवों के नाम पर होने वाले खर्च और वन क्षेत्र से जुड़े खनिज उत्खनन के मामलों को लेकर शिकायतों ने एक बार फिर विभागीय व्यवस्था की निगरानी और जांच की जरूरत को सामने ला दिया है

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्च 2025 में कोतमा वन परिक्षेत्र के रेउला और डड़ई बहरा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख गड्ढे खोदे जाने के बाद मजदूरी भुगतान को लेकर सैकड़ों मजदूर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मजदूरों ने आरोप लगाया था कि उनसे लगभग तीन महीने तक काम कराया गया, लेकिन मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। उस समय कोतमा रेंजर की ओर से कहा गया था कि मजदूरी का भुगतान किया जाएगा तथा काम की संख्या की गणना और मजदूरों के बैंक खातों की जानकारी जैसी प्रक्रियाएं बाकी थीं।

सवाल सिर्फ मजदूरी का नहीं, सत्यापन व्यवस्था का भी

मध्यप्रदेश विधानसभा में 2024 में अनूपपुर वनमंडल को लेकर पूछे गए प्रश्न में CAMPA मद से कराए गए कार्यों की लागत, स्थान, संबंधित अधिकारी, निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी गई थी। सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि अनूपपुर वनमंडल में कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन संबंधित उप वनमंडलाधिकारी द्वारा समय-समय पर किए जाने के बाद ही भुगतान की कार्रवाई पूरी की जाती है।

यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है—यदि प्रत्येक CAMPA एवं वानिकी कार्य का नियमानुसार भौतिक सत्यापन किया जाता है, तो मैदानी स्तर पर किए गए काम, मजदूरों की वास्तविक संख्या, मस्टर रोल, भुगतान और मौके पर मौजूद परिसंपत्तियों का स्वतंत्र मिलान क्यों न कराया जाए?

अनूपपुर वनमंडल पहले भी जांच के घेरे में रहा

फरवरी 2024 के विधानसभा रिकॉर्ड में अनूपपुर के तत्कालीन वनमंडलाधिकारी के खिलाफ शिकायतों का उल्लेख मिलता है। सरकार के जवाब के अनुसार वनमंडल के छह परिक्षेत्रों के अधिकारियों द्वारा शिकायतें मिलने के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सतर्कता/शिकायत) के आदेश से दो सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था और जांच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू किए जाने की बात कही गई थी। उसी विधानसभा प्रश्न में रेत तस्करी और अन्य खनिज पदार्थों से जुड़े गंभीर आरोप भी उठाए गए थे।

हालांकि, इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। आधिकारिक रिकॉर्ड में आरोप और विभागीय जवाब दोनों मौजूद हैं; इसलिए वर्तमान शिकायतों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

हाथियों का मामला भी संवेदनशील

अनूपपुर में हाथियों का आवागमन कोई काल्पनिक विषय नहीं है। विधानसभा के 2026 के रिकॉर्ड के अनुसार छत्तीसगढ़ की ओर से हाथियों के समूह लगातार अनूपपुर की ओर आते हैं और जिले का बड़ा वन क्षेत्र जैतहरी, कोतमा वन परिक्षेत्रों से जुड़ा है।

वहीं 2024 के विधानसभा उत्तर में सरकार ने बताया था कि वर्ष 2011 से अनूपपुर वनमंडल में हाथियों के हमलों में 12 लोगों की मृत्यु हुई और उनके आश्रितों को कुल 54.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

इसलिए हाथी नियंत्रण, गश्त, सुरक्षा, क्षतिपूर्ति और वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित खर्चों की भी रिकॉर्ड आधारित जांच की जा सकती है—विशेषकर यदि किसी शिकायत में इन मदों में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।

खनिज उत्खनन पर भी प्रशासन की कार्रवाई

कोतमा क्षेत्र में अवैध खनिज उत्खनन का मुद्दा भी प्रशासन के सामने रहा है। जून 2026 में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कोतमा तहसील के लोहसरा-बिजुरी क्षेत्र में अवैध रूप से भंडारित रेत जब्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसी अवधि में कोतमा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण के आरोपों को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठी थी।

यह अलग से जांच का विषय है कि किसी विशेष उत्खनन का स्थान वन सीमा के भीतर था या बाहर, संबंधित व्यक्ति के पास वैध अनुमति थी या नहीं और यदि वन भूमि प्रभावित हुई तो वन विभाग ने क्या कार्रवाई की।

अब CM हेल्पलाइन की शिकायत पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि कोतमा वन परिक्षेत्र से संबंधित कई बिंदुओं को लेकर मध्यप्रदेश की CM हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत के जवाब में ऐसी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जो वास्तविक स्थल स्थिति से मेल नहीं खाती।

यह आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच वास्तव में मौके पर हुई थी, तो जांच दल द्वारा तैयार पंचनामा, GPS लोकेशन, स्थल के फोटो-वीडियो, संबंधित कक्ष क्रमांक, मस्टर रोल, मजदूरों के बयान, भुगतान विवरण, नाप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज सामने आने चाहिए।

जांच रिपोर्ट की जांच कौन करेगा?

मामला अब केवल एक शिकायत का नहीं रह जाता। यदि किसी सरकारी शिकायत के निस्तारण में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने का संदेह है तो उसी विभागीय श्रृंखला के बजाय स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी अथवा बहु-विभागीय जांच दल से स्थल सत्यापन कराया जाना अधिक पारदर्शी होगा।

जांच में कम से कम इन बिंदुओं का मिलान जरूरी है—

  1. पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कोतमा वन परिक्षेत्र में स्वीकृत CAMPA एवं अन्य वानिकी कार्यों की सूची।
  2. प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि और वास्तविक भुगतान।
  3. मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की संख्या और बैंक खातों में भुगतान।
  4. कार्यस्थल का GPS/जियो-टैग फोटो एवं वास्तविक स्थल सत्यापन।
  5. पौधरोपण अथवा गड्ढों की वास्तविक संख्या।
  6. सामग्री खरीदी, बिल, वाउचर और संबंधित निविदा/स्वीकृति।
  7. संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट।
  8. हाथी/वन्यजीव प्रबंधन के नाम पर किए गए खर्च और मौके की स्थिति।
  9. वन सीमा में अवैध उत्खनन की शिकायतों तथा जब्ती/प्रकरणों का रिकॉर्ड।
  10. CM हेल्पलाइन में प्रस्तुत शिकायत, विभागीय जांच रिपोर्ट और उसके आधार दस्तावेजों का आपस में मिलान।

असली सवाल—रिकॉर्ड खोले जाएंगे या मामला कागजों में ही बंद रहेगा?

कोतमा वन परिक्षेत्र से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत एक-दूसरे से मेल खाते हैं?

यदि CAMPA और वानिकी कार्य वास्तव में नियमों के अनुसार हुए हैं तो मस्टर रोल, भुगतान विवरण, स्वीकृति आदेश और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक जांच में सामने आने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

और यदि किसी कार्य में अनियमितता हुई है, मजदूरी का भुगतान वास्तविक श्रमिकों को नहीं हुआ है या जांच रिपोर्ट में गलत तथ्य दर्ज किए गए हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

इस पूरे मामले में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच और पिछले तीन वर्षों के कार्यों का दस्तावेजी एवं भौतिक ऑडिट ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

खबर 30 दिन और बीबीसी लाईव की पड़ताल जारी है। संबंधित वन अधिकारियों तथा प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल कोतमा रेंजर को फोन उठाने में परेशानी होती है इसलिए इस मामले में पीसीसीएफ वन बल प्रमुख भोपाल से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया जाएगा साथ ही मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया जाएगा। 

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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