- रिकॉर्ड में 50 हजार पौधे, फेंसिंग से लेकर 16 हजार कंटूर ट्रेंच तक के कार्य प्रस्तावित—सवाल यह कि मौके पर वास्तव में कितना काम हुआ?
रायपुर । महासमुंद। अब्दुल सलाम क़ादरी.
महासमुंद वन मंडल के महासमुंद रेंज में प्रतिपूरक वनीकरण से जुड़े एक बड़े कार्य के दस्तावेज सामने आने के बाद अब इसकी जमीनी स्थिति के सत्यापन की जरूरत सामने आ रही है।
दस्तावेजों के अनुसार COMP No. 41 में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण कार्य प्रस्तावित है। परियोजना में 50,000 पौधे लगाने का लक्ष्य दर्ज है। इसके अलावा फेंसिंग, RCC पोल, कंटूर बंडिंग, कंटूर ट्रेंच, मिट्टी कार्य, सोलर पंप, पानी की व्यवस्था, फायर लाइन सहित अनेक कार्यों का प्रावधान किया गया है।
वर्क-एस्टिमेट में कुल अनुमानित राशि करीब ₹2.05 करोड़ दर्ज है। यह राशि अनुमानित लागत है, इसलिए इसे वास्तविक भुगतान नहीं माना जा सकता। वास्तविक खर्च की पुष्टि बिल, वाउचर, MB और भुगतान रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
सबसे अहम जांच—50 हजार पौधे जमीन पर हैं या नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि रिकॉर्ड में दर्ज 50,000 पौधे वास्तव में उसी निर्धारित 50 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए हैं या नहीं।
जांच के दौरान प्रत्येक प्लांटेशन साइट का—
- GPS लोकेशन,
- जियो-टैग्ड फोटो,
- पौधों की वास्तविक संख्या,
- प्रजातिवार संख्या,
- जीवित पौधों की संख्या,
- पौधों के बीच की दूरी,
- पौधरोपण की वास्तविक तिथि
का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
सरकारी वन-स्वीकृति रिकॉर्ड में भी महासमुंद वन मंडल की अलग-अलग रेंज में COMP साइटों और उनके क्षेत्रफल/कम्पार्टमेंट का विवरण दर्ज है।
एक-एक काम का हो भौतिक सत्यापन
1. 50,000 पौधों का रोपण
रिकॉर्ड में 50 हजार पौधे प्रस्तावित हैं।
जांच: मौके पर वास्तव में कितने पौधे हैं और कितने जीवित हैं?
2. 57,500 पौधों की नर्सरी
नर्सरी के लिए 57,500 पौधों की तैयारी दर्ज है।
जांच: पौधे कहां तैयार किए गए, कितने तैयार हुए और किस स्थल पर भेजे गए?
3. 1,474 RCC पोल
RCC पोल की खरीद का प्रावधान दर्ज है।
जांच: कितने पोल खरीदे गए और कितने मौके पर स्थापित हैं?
4. करीब 34,813.800 किलो चेन-लिंक फेंसिंग
जांच: फेंसिंग वास्तव में कितनी लगी? मौके पर उसका माप कर सामग्री की मात्रा का रिकॉर्ड से मिलान हो।
5. फेंसिंग स्थापना
सिर्फ सामग्री खरीद ही नहीं, बल्कि स्थापना का भी कार्य दर्ज है।
जांच: स्वीकृत मात्रा के मुकाबले वास्तविक फेंसिंग का भौतिक माप हो।
6. 16,000 कंटूर ट्रेंच
यह अत्यंत महत्वपूर्ण मद है।
जांच: मौके पर कितने ट्रेंच बने हैं? उनकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई स्वीकृत मानक के अनुसार है या नहीं?
7. करीब 5,400 घन मीटर फर्टाइल मिट्टी
जांच: मिट्टी वास्तव में कितनी मात्रा में लाई गई और कहां उपयोग हुई? परिवहन रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान हो।
8. 10 सोलर पंप
जांच: सभी 10 पंप मौके पर मौजूद हैं या नहीं और क्या वे चालू हालत में हैं?
9. 10 पानी की टंकियां
जांच: टंकियां मौके पर मौजूद हैं या नहीं और उनका उपयोग पौधों की सिंचाई में हो रहा है या नहीं?
10. 4,000 मीटर फायर लाइन
जांच: मौके पर वास्तविक फायर लाइन कितनी लंबी है?
11. 6,250 मीटर कंटूर बंडिंग
जांच: वास्तविक लंबाई, निर्माण की गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों का सत्यापन हो।
12. लैंटाना हटाने का कार्य
20 हेक्टेयर क्षेत्र में लैंटाना हटाने का कार्य दर्ज है।
जांच: वास्तव में कितने हेक्टेयर से लैंटाना हटाया गया?
13. पुराने स्टंप हटाने का कार्य
जांच: जिन क्षेत्रों में पुराने ठूंठ हटाने का भुगतान/कार्य दर्ज है, वहां मौके पर इसका प्रमाण मौजूद है या नहीं?
14. निरीक्षण पथ
जांच: प्रस्तावित निरीक्षण पथ वास्तव में बनाया गया है या नहीं?
15. साइन बोर्ड
जांच: परियोजना स्थल पर स्वीकृत विवरण वाला बोर्ड लगा है या नहीं?
16. मजदूरों की सूची और मजदूरी दर और अकाउंट न0 का मिलान
सिर्फ कागज नहीं, मौके पर हो जांच
इस मामले में जांच का सही तरीका केवल कार्यालय में फाइल देखने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
फाइल → स्वीकृति → अनुमान → कार्यादेश → MB → बिल-वाउचर → भुगतान → जियो-टैग फोटो → GPS लोकेशन → मौके की वास्तविक स्थिति
इन सभी का आपस में मिलान होना चाहिए।
खासकर 50,000 पौधों की संख्या और उनकी वर्तमान जीवितता का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन सबसे महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रीय CAMPA की वर्तमान व्यवस्था में भी CAMPA कार्यों के लिए Monitoring & Evaluation तथा Geospatial Monitoring व्यवस्था का प्रावधान है।
अब जांच के केंद्र में हो यह सवाल
“महासमुंद रेंज के COMP No. 41 में रिकॉर्ड के अनुसार प्रस्तावित 50 हजार पौधे वास्तव में जमीन पर मौजूद हैं या नहीं?”
यदि पौधे मौजूद हैं तो उनकी GPS आधारित लोकेशन, संख्या, प्रजाति और जीवितता दर सार्वजनिक की जानी चाहिए।
और यदि किसी कार्य के लिए भुगतान किया गया है तो उस कार्य की MB में दर्ज मात्रा और मौके पर मौजूद वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाना चाहिए।
महासमुंद वन मंडल के महासमुंद रेंज में 50 हेक्टेयर के इस प्रतिपूरक वनीकरण कार्य का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन ही बताएगा कि रिकॉर्ड में दर्ज काम और जमीन पर दिखाई देने वाले काम में कितना अंतर है।
खबर 30 दिन और बीबीसी लाईव की पड़ताल का सवाल सीधा है—
50 हजार पौधे कागज पर हैं या वास्तव में जंगल की जमीन पर भी? इसी कड़ी में दूसरे प्लान्टेशन कार्य का अगला अपडेट जल्द …. ? रेंजर और डीएफओ का पक्ष जानने के लिए कुछ दिन पहले फोन पर सम्पर्क किया गया था रेंजर ने हर बार की तरह इस बार भी फोन रिसीव नही किया और डीएफओ द्वारा कहा गया कि मैं मीटिंग में हूँ?






















