October 18, 2026 3:27 pm

पेट्रोल 150 रुपये प्रति लीटर के पार जाने का खतरा! क्या महंगाई का नया तूफान झेलने के लिए तैयार रहे देश की जनता?

  • पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से संकट गहराया, पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो आम आदमी की जेब पर पड़ेगी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026 |  विशेष रिपोर्ट

क्या आने वाले दिनों में देश की जनता को पेट्रोल के लिए 150 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारतीय तेल कंपनियों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच यह सवाल गंभीर होता जा रहा है।

हालांकि, पेट्रोल की कीमत 150 रुपये प्रति लीटर पहुंचने की अभी कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्ट पूर्वानुमान सामने नहीं आया है। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि यदि तेल संकट लंबा खिंचता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा दबाव बन सकता है।

### तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 26 रुपये और डीजल पर 30  रुपये प्रति लीटर तक नुकसान का दावा

17 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जेफरीज के विश्लेषण में बताया गया है कि भारतीय तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर लगभग 26 रुपये और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और आपूर्ति संबंधी परेशानियों के कारण कंपनियों की लागत बढ़ रही है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो कीमतें बढ़ाने का दबाव और अधिक हो सकता है।

### निजी कंपनी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

इसी बीच निजी क्षेत्र की तेल कंपनी नायरा एनर्जी द्वारा पेट्रोल के दाम में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की खबर भी सामने आई है।

इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि बढ़ती लागत का असर अब खुदरा ईंधन बाजार में भी दिखाई देने लगा है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने 18 अक्टूबर को प्रमुख महानगरों में कीमतों में नई बढ़ोतरी नहीं की है।

### आज देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमत

18 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित दरें, रुपये प्रति लीटर

| शहर | पेट्रोल |
| ——— | ——- |
| नई दिल्ली | ₹102.12 |
| मुंबई | ₹111.21 |
| कोलकाता | ₹113.51 |
| चेन्नई | ₹107.76 |
| बेंगलुरु | ₹111.68 |
| हैदराबाद | ₹116.15 |

आखिर 150 रुपये तक पहुंचने की आशंका क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा पड़ता है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी बड़ी चिंता बनी हुई है। पूर्व में गोल्डमैन सैक्स ने गंभीर आपूर्ति बाधा की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने का जोखिम बताया था।

यदि तेल कंपनियों की लागत लगातार बढ़ती रही और सरकार की ओर से करों में राहत नहीं मिली, तो पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी संभव है। हालांकि 150 रुपये का स्तर कब आएगा या आएगा भी या नहीं, इसका विश्वसनीय अनुमान अभी उपलब्ध नहीं है।

 पेट्रोल महंगा हुआ तो रसोई से लेकर बाजार तक पड़ेगा असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी केवल वाहन चालकों की समस्या नहीं होगी। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई, कृषि कार्य और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सब्जियों, अनाज, दूध, किराना सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

यदि पेट्रोल 110 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति लीटर हो जाए, तो 40 लीटर पेट्रोल खरीदने वाले वाहन मालिक को हर बार 1,600 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।

अर्थशास्त्रियों ने भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान का हवाला देते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान खुदरा महंगाई 6.2 प्रतिशत तक पहुंचने का जोखिम बताया गया है।

### सरकार के सामने बड़ी चुनौती, जनता को राहत मिलेगी या बढ़ेगा बोझ?

देश में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र तथा राज्य सरकारों के अलग-अलग कर लागू होते हैं। ऐसे में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ जनता पर डालने के बजाय करों में राहत देना भी एक नीतिगत विकल्प हो सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तेल संकट और गंभीर हुआ तो सरकार आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए क्या कदम उठाएगी?

क्या पेट्रोल-डीजल पर करों में कटौती की जाएगी? क्या तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को सीमित करने के लिए कोई विशेष व्यवस्था बनाई जाएगी? या फिर आम आदमी को एक बार फिर महंगे ईंधन का बोझ उठाना पड़ेगा?

 बड़ा सवाल

जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था और हर परिवार के घरेलू बजट पर पड़ता है।

ऐसे में केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अंतरराष्ट्रीय तेल संकट के बावजूद आम जनता को कितनी राहत दी जा सकती है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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