October 26, 2026 2:21 pm

किस अधिकारी के संरक्षण में चल रहा महाकाल कंपनी का कथित अवैध रेत कारोबार?

  •  उमरिया में नदियों और नालों के अस्तित्व पर संकट, खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल; शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का इंतजार!

अब्दुल सलाम कादरी-भोपाल। उमरिया, मध्य प्रदेश। जिले में रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि उमरिया की नदियों और नालों में बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन के कारण प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। जो नदी-नाले अभी बचे हैं, वहां भी कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर उत्खनन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

इस पूरे मामले में महाकाल कंपनी की भूमिका और जिला खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कागजों में नियमों और अनुमति की तस्वीर कुछ और दिखाई जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग होने की आशंका है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल खनिज नियमों के पालन पर सवाल है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दावों की भी परीक्षा है।

“उमरिया में रेत माफियाओं का राज! नदी-नाले छलनी, जंगल खाली और प्रशासन मौन”

जिला खनिज अधिकारी से सवाल, जवाब पर भी उठे प्रश्न

इस मामले में जब जिला खनिज अधिकारी विद्याकांत तिवारी से बात की गई, तो शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी ओर से संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। मामले की जानकारी कलेक्टर तक पहुंचाए जाने का भी दावा किया गया है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

उमरिया में रेत माफियाओं का बोलबाला, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि उत्खनन नियमों के अनुरूप हो रहा है, तो विभाग तथ्यों और दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

मध्यप्रदेश के उमरिया में रेत माफियाओं का बोलबाला, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

शिकायतें और खबरें प्रकाशित, फिर भी कार्रवाई का इंतजार?

शिकायतकर्ता का दावा है कि मुख्यमंत्री जनसेवा पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों पर शिकायतें की गईं और इस विषय पर कई खबरें भी प्रकाशित की गईं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

उमरिया–शहडोल–अनूपपुर में हजारों ट्रक रेत का अवैध भंडारण! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह खेल?

अब सवाल केवल किसी एक कंपनी का नहीं, बल्कि उस निगरानी व्यवस्था का है, जिसका दायित्व खनिज संपदा की रक्षा करना और अवैध उत्खनन पर रोक लगाना है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को सामने आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र में उत्खनन की अनुमति किन शर्तों पर दी गई है, वास्तविक उत्खनन कितना हो रहा है और नियमों के उल्लंघन की जांच हुई है या नहीं।

कलेक्टर से मंत्री तक कमीशन पहुंचाने का दावा—आखिर किसके दम पर चल रहा रेत का कारोबार?

पर्यावरण को नुकसान हुआ तो जवाबदेही किसकी?

नदियां और नाले केवल रेत के स्रोत नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जल व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि अवैध उत्खनन के कारण इन्हें नुकसान पहुंच रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं। क्या संबंधित स्थलों का निरीक्षण होगा? क्या अनुमति, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी? और क्या जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?

फिलहाल, महाकाल कंपनी के कथित अवैध रेत कारोबार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों पर निष्पक्ष जांच तथा आधिकारिक जवाब का इंतजार है।

इस मामले की अगली कड़ी जल्द…

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

विज्ञापन
error: Content is protected !!