October 11, 2026 12:20 pm

बैकुंठपुर वन मंडल में गड्ढा खुदाई की मजदूरी पर सवाल, 42 रुपये के निर्धारित रेट के मुकाबले 25 रुपये मिलने का आरोप

  • ग्राम बारी और मुकुम में सीए प्लांटेशन के कार्यों की जांच की मांग, रेंजर, एसडीओ और डीएफओ की भूमिका पर उठे सवाल

बैकुंठपुर, छत्तीसगढ़। अब्दुल सलाम कादरी

वन विभाग में पौधरोपण से जुड़े कार्यों में मजदूरी भुगतान और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामला बैकुंठपुर वन मंडल के बैकुंठपुर रेंज अंतर्गत ग्राम बारी और मुकुम में कराए गए गड्ढा खुदाई के कार्यों का बताया जा रहा है। आरोप है कि गड्ढा खुदाई के लिए मजदूरों को निर्धारित दर से कम भुगतान किया जा रहा है, जबकि कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है।

42 रुपये के निर्धारित रेट के मुकाबले 25 रुपये मिलने का आरोप

प्राप्त जानकारी और मजदूरों के कथित बयानों के अनुसार, गड्ढा खुदाई के लिए पहले 20 रुपये प्रति गड्ढा दिए जाने की बात सामने आई थी, जबकि वर्तमान में मजदूरों को 25 रुपये प्रति गड्ढा मिलने का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, संबंधित कार्य के स्टीमेट में प्रति गड्ढा 42 रुपये की दर निर्धारित होने की बात कही जा रही है।

यदि स्टीमेट में निर्धारित दर 42 रुपये प्रति गड्ढा है और मजदूरों को वास्तव में केवल 25 रुपये दिए जा रहे हैं, तो शेष राशि का भुगतान किस मद में और किस आधार पर किया जा रहा है, यह जांच का विषय है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए स्वीकृत स्टीमेट, कार्यादेश, भुगतान अभिलेख और मजदूरों के बयान का आधिकारिक सत्यापन आवश्यक है।

दैनिक मजदूरी में भी अंतर का दावा

मजदूरी भुगतान को लेकर दूसरा सवाल दैनिक दर पर उठाया जा रहा है। आरोप है कि जहां दैनिक मजदूरी लगभग 350 से 355 रुपये निर्धारित होने की बात कही जा रही है, वहीं मजदूरों को केवल 300 रुपये दिए जा रहे हैं।

यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित कार्य में लागू आधिकारिक मजदूरी दर क्या है, भुगतान किस योजना और मद से किया जा रहा है तथा गड्ढा खुदाई की दर और दैनिक मजदूरी का आपस में क्या संबंध है। दोनों दरें अलग-अलग भुगतान व्यवस्थाओं से संबंधित हो सकती हैं, इसलिए दस्तावेजों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

गड्ढों की सफाई और गुणवत्ता पर भी सवाल

स्थल पर कराए गए कार्यों को लेकर आरोप है कि गड्ढों की समुचित सफाई नहीं की गई और कई स्थानों पर ठूंठ भी नहीं निकाले गए। यदि निरीक्षण में ये कमियां प्रमाणित होती हैं, तो यह देखना होगा कि कार्य की गुणवत्ता जांचने वाले अधिकारियों ने किन मानकों के आधार पर काम को स्वीकार किया।

कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में संबंधित परियोजना की लागत, स्वीकृत कार्य, जिम्मेदार एजेंसी, तकनीकी स्वीकृति और कार्य पूर्णता की स्थिति सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।

रेंजर, एसडीओ और डीएफओ की भूमिका पर सवाल

इस मामले में बैकुंठपुर रेंज के रेंजर, एसडीओ कंवर और डीएफओ परदेशी की प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोपों में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की दोबारा पदस्थापना और सीए प्लांटेशन परियोजनाओं की निगरानी की जांच होनी चाहिए।

हालांकि, पदस्थापना के लिए कथित तौर पर लाखों रुपये दिए जाने का दावा स्वतंत्र प्रमाण के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस संबंध में कोई दस्तावेज या अन्य पुष्ट साक्ष्य सामने आने पर ही इसकी विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकता है।

करोड़ों रुपये की सीए परियोजना की जांच जरूरी

क्षतिपूरक वनीकरण यानी सीए प्लांटेशन में सरकारी धन के उपयोग, पौधरोपण, गड्ढा खुदाई, मजदूरी भुगतान और रखरखाव का सही रिकॉर्ड होना जरूरी है। इसलिए ग्राम बारी और मुकुम में कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि स्वीकृत गड्ढों की संख्या कितनी थी, वास्तव में कितने गड्ढे खोदे गए, प्रति गड्ढा स्वीकृत दर क्या थी, मजदूरों को कितना भुगतान हुआ और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड वास्तविक कार्य से मेल खाते हैं या नहीं।

अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका

इस संबंध में रेंजर, एसडीओ और डीएफओ से संपर्क करने का प्रयास किए जाने की जानकारी दी गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

ग्राम बारी और मुकुम में गड्ढा खुदाई तथा मजदूरी भुगतान से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को स्वीकृत स्टीमेट, मस्टर रोल, भुगतान विवरण और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट का मिलान कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जांच से ही पता चलेगा कि मामला भुगतान संबंधी अनियमितता का है या निर्धारित नियमों के अनुरूप कार्य किया गया है। इसी कड़ी में अगला अपडेट जल्द…

रिपोर्ट: अब्दुल सलाम क़ादरी | खबर 30 दिन

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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