September 25, 2026 7:06 am

सुप्रीम कोर्ट ने जली नकदी मामले की एफआईआर और एसआईटी मांग ठुकराई

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े चर्चित "जली हुई नकदी" मामले में एफआईआर दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. यह याचिका एक वकील ने दाखिल की थी. कोर्ट ने इसे पब्लिसिटी के लिए दाखिल याचिका बताते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया.

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच के सामने यह मामला सुनवाई के लिए आया. याचिका दाखिल करने वाले वकील घनश्याम उपाध्याय ने खुद कोर्ट में पक्ष रखा.

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में एक शिकायत दर्ज कराई है और वे खुद एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट हैं. जब कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या वे इस मामले में खुद पार्टी की तरह पेश हो रहे हैं तो उपाध्याय ने हां में जवाब दिया.

याचिका में मुख्य दलील यह थी कि किसी जज का पद से इस्तीफा दे देना उसे बेहिसाब नकदी से जुड़ी आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर देता. यानी अगर इस्तीफा भी दे दिया जाए तो भी कानूनी जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित की जाए और यह जांच सीधे कोर्ट की निगरानी में हो.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह याचिका सस्ती पब्लिसिटी हासिल करने के मकसद से दाखिल की गई लगती है.

बेंच ने इसे कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और कहा कि वे इस याचिका पर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं. इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया.

जस्टिस यशवंत वर्मा का जली हुई नकदी का मामला पहले से ही देशभर में चर्चा का विषय रहा है और इस याचिका की खारिजी के बाद अब इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई फिलहाल थमती दिख रही है.

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Author: Editor

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