October 17, 2026 3:57 am

JNU हड़ताल: पदाधिकारियों को एक साल के लिए बाहर किया गया, छात्र-नेताओं ने वापसी की की मांग

 नई दिल्ली

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन के उस फैसले की कड़ी निंदा की है जिसमें जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के सभी मौजूदा पदाधिकारियों और इसके पूर्व अध्यक्ष को दो सेमेस्टर यानी 1 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इसके बाद से विश्वविद्यालय में हड़ताल का आयोजन किया गया.  

निष्कासित किए गए लोगों में जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं. विश्वविद्यालय ने छात्रों के परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है. 

जारी हुआ बयान

संकाय संघ ने कहा है कि यह कदम कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के नेतृत्व में विरोध को दबाने के लिए किया गया है. निष्कासित छात्रों को कैंपस में आने पर रोक लगा दी गई है और उन पर भारी जुर्माना लगाया गया है.

क्या है विवाद? 

यह विवाद विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की स्थापना को लेकर था. इस दौरान कुलपति पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. 2 फरवरी को जारी कार्यालय आदेश में मुख्य प्रॉक्टर ने बताया कि राजनीति अध्ययन केंद्र के पीएचडी छात्र नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया गया है. उन पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है और 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. आदेश के अनुसार, जांच समिति ने छात्रों को विश्वविद्यालय लाइब्रेरी के अंदर लगाए गए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी उपकरणों को तोड़ने के लिए जिम्मेदार माना है. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अनुशासनात्मक नियमों के तहत की गई है और पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही फैसला लिया गया है. 
छात्रों ने की आलोचना 

जेएनयू छात्र संघ और वामपंथी छात्रों के ग्रुप ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि यह कदम छात्रों की असहमति दबाने के लिए किया गया है. बयान में जेएनयूएसयू ने प्रशासन और कुलपति पर आरोप लगाया कि वे आरएसएस और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं. 

समय को लेकर भी हुए सवाल 

जेएनयूएसयू की ओर से निष्कासन के समय पर भी सवाल उठाए हैं. यह कदम उस समय लिया गया जब छात्र यूजीसी के नए नियम 2026 के खिलाफ जुलूस और छात्र संसद जैसे विरोध प्रदर्शन करने वाले थे. छात्र संघ का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद छात्र आंदोलन को कमजोर करना और आने वाले प्रदर्शन की तैयारी को रोकना है. 

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Author: Editor

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