September 19, 2026 11:57 pm

ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई: कारकाबेड़ा गांव में पहली बार खुला स्कूल, बच्चों में उत्साह

नारायणपुर.

अबूझमाड़ के अति दूरस्थ क्षेत्र कारकाबेड़ा में पहली बार स्कूल की शुरुआत हुई। यह पहल कलेक्टर नम्रता जैन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकांक्षा शिक्षा खलको के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। बच्चों और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुनते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई। इस सफलता की शुरुआत जनसमस्या निवारण शिविर से हुई, जिसमें ग्रामीणों ने आवेदन देकर कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की मांग रखी थी।

कलेक्टर नम्रता जैन ने तत्काल निर्देश जारी किए और जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को स्कूल खोलने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद संकुल समन्वयक और शिक्षकों की टीम ने सर्वेक्षण कर बच्चों की संख्या और शैक्षणिक आवश्यकता का आंकलन किया। सर्वे में पाया गया कि गांव में लगभग 20 बच्चे पढ़ाई के योग्य हैं। स्कूल खोलने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए करीब 5 घंटे की पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का उद्घाटन किया। इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी संतुराम नूरेटी, खंड स्रोत समन्वयक लक्ष्मीकांत सिंह, संकुल समन्वयक कारूराम नूरेटी और सरपंच रामूराम वड्डे भी मौजूद रहे। स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्लेट, पेंसिल और श्यामपट्ट जैसी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस पहल से बच्चों और ग्रामीणों में खुशी और उत्साह देखने को मिला। वर्तमान में इस स्कूल में 20 बच्चों को पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है, और इसके लिए जिला प्रशासन ने एक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था भी की है।

भविष्य में आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों जैसे मरकूड़ के बच्चे भी इस स्कूल का लाभ ले सकेंगे। स्वतंत्रता के बाद पहली बार कारकाबेड़ा में स्कूल की स्थापना होने के कारण यह कदम क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल से अबूझमाड़ के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें स्कूल आने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं रहेगी। इस कदम से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण समुदाय में जागरूकता और विकास की भावना भी मजबूत होगी। कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की यह पहल यह संदेश देती है कि दूरदराज के क्षेत्र में भी सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यवाही के जरिए शिक्षा को सुलभ बनाना संभव है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि भविष्य में इस क्षेत्र में शिक्षा और विकास के कार्यक्रम नियमित रूप से चलेंगे और बच्चों की पढ़ाई के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

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Author: Editor

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