- ऑनलाइन भुगतान की जानकारी भी नहीं दी गई, अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी।
अब्दुल सलाम क़ादरी-9424257566
बैकुंठपुर। बैकुंठपुर वनमंडल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई वित्तीय जानकारी उपलब्ध नहीं कराने को लेकर डीएफओ बैकुंठपुर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरटीआई आवेदक का आरोप है कि विभाग ने चेक ड्रॉन (Cheque Drawn) अथवा भुगतान संबंधी विवरण देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि विभाग में चेक ड्रॉन का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जाता क्योंकि भुगतान ऑनलाइन किया जाता है।
आवेदक का कहना है कि यदि भुगतान ऑनलाइन किया गया है तो ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, भुगतान आदेश, लाभार्थियों के नाम, राशि और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे। लेकिन विभाग ने वह जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे संदेह और गहरा गया है।
आरोप है कि वन विभाग के अंतर्गत हुए तालाब निर्माण कार्यों में जेसीबी मशीनों से कार्य कराया गया, जबकि रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में मजदूरों के नाम दर्ज कर मजदूरी भुगतान दर्शाया गया। आवेदक का दावा है कि वास्तविक मजदूरों से कार्य नहीं कराया गया और फर्जी नामों के माध्यम से सरकारी राशि का आहरण कर लिया गया।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग सूचना देने से बचने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 और धारा 11 का अनुचित हवाला दे रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से हुए कार्यों और भुगतान का विवरण सार्वजनिक सूचना की श्रेणी में आता है, इसलिए उसे छिपाया नहीं जा सकता।
मामले को लेकर आवेदक ने कहा है कि अब इस पूरे प्रकरण को हाईकोर्ट में जनहित याचिका अथवा अन्य उपयुक्त कानूनी कार्यवाही के माध्यम से उठाया जाएगा, ताकि विभाग से सभी वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत कराए जा सकें और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच हो सके।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो तालाब निर्माण, मजदूरी भुगतान और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आ सकती है। इससे वन विभाग के अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
वन विभाग का पक्ष:
इस संबंध में डीएफओ बैकुंठपुर का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






















