August 3, 2026 12:48 pm

छात्राओं को मिली घटिया साइकिलों पर मचा बवाल, 4050 रुपये की खरीद पर उठे सवाल; विपक्ष ने लगाए कमीशनखोरी के आरोप

  • नई साइकिलों के टायर पिचके, घंटी टूटी, चेन खराब; सरकार की सरस्वती साइकिल योजना की गुणवत्ता पर विपक्ष का हमला

रायपुर। अब्दुल सलाम क़ादरी

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल योजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। प्रदेशभर में लगभग ढाई लाख छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि नई साइकिलें वितरण के समय ही खराब हालत में थीं। कहीं टायरों में हवा नहीं थी, कहीं घंटियां टूटी हुई थीं, तो कई साइकिलों की चेन पहली ही सवारी में उतर गई या जाम हो गई।

इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि करीब 100 करोड़ रुपये की खरीद में 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी हुई, जिसके कारण छात्राओं को निम्न गुणवत्ता की साइकिलें उपलब्ध कराई गईं।

 कई सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मिली नई साइकिलें शुरू से ही तकनीकी खामियों से भरी हुई थीं। कई छात्राओं ने बताया कि साइकिल लेते ही टायर पंक्चर जैसी स्थिति में थे, ब्रेक सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे और घंटियां टूटी हुई थीं।

कुछ स्थानों पर तो अभिभावकों को साइकिलों को मरम्मत के लिए स्थानीय दुकानों तक ले जाना पड़ा। इससे योजना के उद्देश्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।


विपक्ष का आरोप—’कमीशन के कारण गुणवत्ता से समझौता’

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यदि सरकार वास्तव में छात्राओं के हित में काम करना चाहती, तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से निर्धारित राशि सीधे छात्राओं के बैंक खातों में भेज सकती थी। इससे छात्राएं अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिल खरीद सकती थीं।

विपक्ष का कहना है कि केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी की संभावना अधिक रहती है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है।


सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं

अब तक राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। यदि सरकार इस मामले में जांच कराती है, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी कि शिकायतें कितनी व्यापक हैं और खरीद प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।

गुणवत्ता जांच की उठी मांग

शिक्षा से जुड़े सामाजिक संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी खरीद में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की है कि—

  • सभी जिलों में वितरित साइकिलों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
  • खराब साइकिलों को तत्काल बदलकर नई साइकिलें दी जाएं।
  • खरीद प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
  • यदि किसी स्तर पर अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं सप्लायरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

योजना का उद्देश्य क्या है?

सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य दूरदराज़ क्षेत्रों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना, ड्रॉपआउट कम करना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है। हर वर्ष हजारों छात्राओं को सरकार की ओर से निःशुल्क साइकिलें उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन यदि साइकिलें ही उपयोग योग्य नहीं हों, तो योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

क्या हैं तथ्य और क्या हैं आरोप?

  • तथ्य: कई स्थानों से साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें और मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं।
  • आरोप: विपक्ष ने खरीद में कमीशनखोरी और लगभग 40 प्रतिशत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
  • स्थिति: इन आरोपों की अभी तक किसी आधिकारिक जांच या न्यायिक प्रक्रिया से पुष्टि नहीं हुई है।

सरस्वती साइकिल योजना लाखों छात्राओं के भविष्य से जुड़ी योजना है। ऐसे में साइकिलों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समाधान होना आवश्यक है। यदि शिकायतें सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि योजना की विश्वसनीयता बनी रहे।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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