- महासमुंद वनमंडल के दो कम्पार्टमेंट में प्रथम वर्ष संचालन कार्यों पर सवाल, लागत, स्टिमेट, खरीदी और भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे गए
अब्दुल सलाम क़ादरी। महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद वनमंडल में वर्ष 2025-26 के अंतर्गत किए गए प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के दो कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत इन कार्यों से संबंधित संपूर्ण अभिलेख मांगे गए हैं। आवेदन में प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, विस्तृत प्राक्कलन (Estimate), सामग्री खरीदी, भुगतान, मस्टर रोल, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, निरीक्षण रिपोर्ट, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र सहित सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं।
मामला सरायपाली वन परिक्षेत्र का…
जानकारी के अनुसार सरायपाली के Comp No. 495 A के लिए ₹39,30,200 तथा Comp No. 494 के लिए ₹29,47,650 स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों कार्यों की कुल स्वीकृत राशि ₹68,77,850 है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों कम्पार्टमेंट में प्रथम वर्ष के पौधारोपण एवं रखरखाव का कार्य शत-प्रतिशत पूरा नहीं हुआ, जबकि प्रथम वर्ष संचालन की राशि का भुगतान किए जाने की आशंका है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीनी स्थिति और उपलब्ध अभिलेखों में गंभीर अंतर होने की संभावना है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आरटीआई आवेदन के अलावा भी इस मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज और अभिलेख हमारे पास सूत्रों के माध्यम से पूर्व से उपलब्ध हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन अभिलेखों का अंतिम सत्यापन सक्षम प्राधिकारी की जांच तथा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले आधिकारिक रिकॉर्ड से ही संभव होगा। इसी उद्देश्य से आरटीआई के माध्यम से आधिकारिक दस्तावेज मांगे गए हैं, ताकि उपलब्ध सूचनाओं और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।
इस संबंध में वन मंत्री केदार कश्यप से भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि उक्त शिकायत अभी उनके पास प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी रेंजर, एसडीओ, डीएफओ अथवा अन्य अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
अब सबकी निगाहें वन विभाग के जवाब और संभावित जांच पर टिकी हैं। आरटीआई से प्राप्त होने वाले आधिकारिक दस्तावेज तथा जांच रिपोर्ट यह तय करेंगे कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ या वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में कितना दम है।






















