October 17, 2026 11:16 pm

जिसके खिलाफ शिकायत, उसी को बना दिया जांच अधिकारी! बेलगहना वन परिक्षेत्र में सीएम पोर्टल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल

  • खुद पर लगे आरोपों की खुद ही जांच कर शिकायत को बताया निराधार, सीएम पोर्टल पर मामला ‘फोर्स क्लोज’! क्या मुख्यमंत्री लेंगे संज्ञान?

बिलासपुर/बेलगहना (छत्तीसगढ़)।

अब्दुल सलाम कादरी।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर वनमंडल अंतर्गत बेलगहना वन परिक्षेत्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल की जांच प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में आरोप है कि जिस अधिकारी के विरुद्ध शिकायत की गई थी, उसी वन अधिकारी अधिकारी को शिकायत की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया। इतना ही नहीं, संबंधित जांच अधिकारी ने अपने ही विरुद्ध लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए शिकायत को सीएम पोर्टल पर ‘फोर्स क्लोज’ कर दिया।

यदि शिकायत से जुड़े दस्तावेजों और पोर्टल की कार्यवाही से इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक शिकायत के निस्तारण का मामला नहीं, बल्कि पूरी जांच व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न है।

सवाल यह है कि आरोपी अधिकारी अपनी ही शिकायत का निष्पक्ष जांचकर्ता कैसे बन सकता है?

शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को न्याय दिलाना और प्रशासनिक अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। लेकिन बेलगहना वन परिक्षेत्र से जुड़े इस मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुसार जांच की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत किसी अधिकारी के विरुद्ध हो, तो उसी अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई? क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच अधिकारी नियुक्त करते समय हितों के टकराव की संभावना पर विचार किया?

शिकायत को ‘फोर्स क्लोज’ करने का आदेश किसने दिया?

मामले में शिकायत को ‘फोर्स क्लोज’ किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत बंद करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और उसके समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।

क्या शिकायतकर्ता का पक्ष सुना गया? क्या मौके पर स्वतंत्र जांच की गई? क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए अभिलेखों का परीक्षण हुआ? या फिर संबंधित अधिकारी की रिपोर्ट को ही अंतिम आधार मान लिया गया?

इन सवालों का जवाब सामने आना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन के दावों पर सवाल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन पर जोर दे रही है। छत्तीसगढ़ की आधिकारिक सीएम हेल्पलाइन भी शिकायतों के समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण को अपना उद्देश्य बताती है।

ऐसे में बेलगहना वन परिक्षेत्र का यह मामला और गंभीर हो जाता है। यदि आरोप सही हैं, तो प्रश्न उठता है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

इन पांच सवालों का जवाब दे वन विभाग

* जिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत थी, उसी को जांच अधिकारी किसने और क्यों बनाया?

* क्या जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कराई?

* शिकायत को निराधार घोषित करने के लिए किन प्रमाणों का सहारा लिया गया?

* सीएम पोर्टल पर शिकायत ‘फोर्स क्लोज’ करने की अनुमति किस सक्षम अधिकारी ने दी?

* क्या वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराएंगे?

क्या मुख्यमंत्री स्वयं लेंगे संज्ञान?

बेलगहना वन परिक्षेत्र से जुड़े इस मामले में आवश्यकता है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं संज्ञान लेकर वन विभाग के किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी अथवा जांच दल से पूरे प्रकरण की जांच कराएं। मुख्यमंत्री को विशेष तौर पर अलग से शिकायत भेजी गई है…

साथ ही शिकायत आवंटन, जांच प्रतिवेदन और शिकायत बंद करने से संबंधित सभी आदेशों का परीक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत का निस्तारण नियमानुसार हुआ या प्रक्रिया में कोई अनियमितता बरती गई।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस गंभीर मामले में स्वतंत्र जांच के आदेश देते हैं या बेलगहना वन परिक्षेत्र की शिकायत सरकारी पोर्टल पर बंद होकर ही रह जाएगी।

 

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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