March 5, 2026 5:50 pm

कागजों में हरियाली, ज़मीन पर सवाल—जोहिला में SECL फंड से जुड़े कथित घोटाले की परतें खुलीं

अब्दुल सलाम क़ादरी

जोहिला-उमरिया (मध्य प्रदेश)15 जनवरी 2026

Secl जोहिला क्षेत्र में वन विकास निगम के एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) से प्राप्त विकास और पर्यावरण-संरक्षण निधियों के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों, वन कर्मियों और सूत्रों के अनुसार निगम द्वारा प्राप्त औद्योगिक क्षेत्र उपच्छेद निधि (SECL से मिलने वाली धनराशि) का उपयोग प्लांटेशन कार्यों, मजदूरी भुगतान और सामग्री खरिद में फर्जीवाड़ा कर आरोपित किया जा रहा है।

1. कम राशि का भुगतान दिखाकर धन का गबन

सूत्रों ने बताया कि एसईसीएल से प्राप्त प्लांटेशन/वन संवर्धन कार्यक्रमों के लिए मिले बजट का वास्तविक काम से कम खर्च दिखाया गया, जबकि बड़े हिस्से को ग़ैर-ज़मीनी खर्चों में उपयोग किया गया — जैसे फर्जी दस्तावेज, नकली मजदूरी रसीदें और बिना काम के भुगतान।

  1. आधिकारिक तौर पर पुष्टि न होते हुए भी स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा है कि वास्तविक रूप से किए जाने वाले वृक्षारोपण और देखभाल कार्यों का ब्योरा बैंक खातों तथा खर्च दस्तावेजों में कम दिखाया गया, जिससे कुछ धनराशि का ग़लत दिशा में इस्तेमाल होने का शक लगाया जा रहा है।

2. फर्जी मजदूर पंजीकरण और धन निकासी

स्थानीय ग्रामीणों और कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों ने आरोप लगाया है कि कई “मजदूरों” के नाम पर दस्तावेज तैयार किए गए हैं, जिन्होंने कोई वास्तविक काम नहीं किया — फिर भी उनके नाम पर मजदूरी का पैसा निकाला गया। ऐसा लगता है कि नकली हाज़िरी और मजदूरी रसीदों के आधार पर बड़ी राशि व्यवस्थागत रूप से जारी की गई और बाद में वापस बैंक खातों से निकाली गई।

इस तरह के कर्मी-आधारित गड़बड़ियां अन्य राज्यों में भी देखने को मिली हैं — उदाहरण के लिए ओडिशा में वन विभाग के एक अधिकारी ने फर्जी दस्तावेज बनाकर Soil and Moisture Conservation (SMC) कार्यों के लिए तैयार किये गये भारी राशियों को ग़लत तरीके से खर्च करने पर गिरफ्तारी का सामना किया गया था।

3. सामग्रियों की खरीद में अनियमितता

वन विकास निगम के लिये खरीदी गयी योजनात्मक सामग्रियों — जैसे पौधे, ढाल सामग्री, भू-संरक्षण उपकरण आदि — के बिल और वास्तविक वस्तुओं के बीच अंतर बताया जा रहा है। शिकायतों के अनुसार कुछ सामग्रियां या तो कम आपूर्ति की गयीं या उनकी गुणवत्ता/मात्रा कम दर्शाई गयी ताकि पैसा बचाया जा सके और फिर उसी राशि का उपयोग अन्य गैरलाभकारी खातों में दिखाया गया।

4. शिकायत और जांच की मांग

स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विकास निगम प्रबंधन तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उच्च अधिकारियों और सतर्कता विभाग में जांच की मांग उठाई है, ताकि:

  • SECL से आवंटित निधि के उपयोग के प्रति पारदर्शिता लाई जा सके।
  • नकली मजदूरों के नाम पर धन निकासी की जाँच हो।
  • खरीदी दस्तावेजों की वस्तुनिष्ठ जाँच

बता दें कि भारत में वन विभाग और उससे जुड़ी परियोजनाओं में निधियों के दुरुपयोग के कुछ मामले पहले भी सामने आ चुके हैं:

  • ओडिशा में एक फॉरेस्ट विभाग अधिकारी को पकड़ा गया, जिन्होंने SMC और afforestation कार्यों में फर्जी दस्तावेज दिखाकर ₹55 लाख से अधिक सरकारी राशि का गबन किया।

  • वन निगम खातों में बड़े फंड्स के ग़लत निवेश और फर्जी एफडीआर से करोड़ों रुपए गायब होने के मामलों जैसे उत्तर प्रदेश वन निगम का मामला भी प्रकाश में हैं।

ये उदाहरण दिखाते हैं कि जब पर्यावरण-संरक्षण योजनाओं में वित्तीय निगरानी कमजोर हो जाती है तो घोटाले की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय प्रशासन, सतर्कता विभाग और राज्य सरकार को जल्द:  इस मामले की स्वतंत्र विशेष जांच एजेंसी से जांच करनी चाहिए।एसईसीएल और वन विकास निगम के बीच निधि हस्तांतरण का लेखा परीक्षण होना चाहिए।
नकली मजदूरों के नामों पर भुगतान के दस्तावेजों की डिजिटल/हमसफर सत्यता जाँची जानी चाहिए।

पूर्व की जांच दबाई गई और कैसे दबाई गई -अगली खबर में आपको बताएंगे….

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

विज्ञापन