April 18, 2026 1:16 pm

SECL खदानों में ‘काले हीरे’ की खुली लूट? राजनगर से बिजुरी तक फैला कोयला घोटाले का जाल, हसदेव के बड़े अधिकारियों पर भी सवाल

अब्दुल सलाम कादरी-प्रधान संपादक

  • खुलासे, जमीनी आरोपों से पुष्टि — अब वीडियो-फोटो के साथ CMD और दिल्ली विजिलेंस तक पहुंचेगी शिकायत

अनूपपुर/हसदेव क्षेत्र | विशेष जांच रिपोर्ट

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के हसदेव क्षेत्र की कोयला खदानें इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में हैं। “काला हीरा” कहे जाने वाले कोयले की खुलेआम लूट और अनियमितताओं के आरोप अब केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अखबारों की सुर्खियों से लेकर जमीनी हकीकत तक फैल चुके हैं।

राजनगर खुली खदान, हल्दीबाड़ी, कुरजा और बिजुरी जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी, अवैध वसूली और गुणवत्ता में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे सिस्टम में नीचे से लेकर ऊपर तक मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

साइड विजिट वीडियो रिकार्डिंग से हुआ बड़ा खुलासा

  • राजनगर खुली खदान में “काले हीरे की खुली लूट” हो रही है
  • एरिया सेल्स मैनेजर प्रमोद यादव पर संरक्षण देने के आरोप
  • लिफ्टरों के माध्यम से महंगे कोयले को बाहर निकाला जा रहा है
  • लोडिंग के नाम पर अवैध वसूली हो रही है
  • नियम-कानून पूरी तरह फेल नजर आ रहे हैं।

दूसरी मामले में यह भी स्पष्ट  है कि:

  • हसदेव क्षेत्र में कोयले का “काला खेल” एरिया सेल्स मैनेजर के संरक्षण में चल रहा है
  • रोड सेल के नाम पर गुणवत्ता में हेरफेर कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है
  • ट्रांसपोर्टरों से प्रति ट्रक हजारों रुपये की वसूली हो रही है

यह दोनों कटिंग इस बात की पुष्टि करती हैं कि मामला सिर्फ अफवाह नहीं बल्कि गंभीर स्तर का संगठित घोटाला हो सकता है।

कैसे चल रहा है पूरा खेल? (Modus Operandi)

1. बंकर सिस्टम में छेड़छाड़

सूत्रों के अनुसार, सामान्य प्रक्रिया में कोयले को एक ही बंकर से सीधे गाड़ियों में लोड किया जाना चाहिए। लेकिन यहां जानबूझकर जटिल प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

  • बंकरों में “छन्ना जाली” लगाई जाती है
  • बड़े साइज का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला (स्टीम कोल) अलग कर लिया जाता है
  • छोटे टुकड़ों वाला कोयला गाड़ियों में भरा जाता है

2. लेबर के जरिए कोयले की छंटाई

  • मजदूरों को लगाकर कोयले को “छांट-छांट कर” दिया जाता है
  • उच्च गुणवत्ता का कोयला अलग चैनल से बेचा जाता है

3. लिफ्टर नेटवर्क

  • बाहरी कंपनियों और लिफ्टरों के माध्यम से कोयले की निकासी
  • रिकॉर्ड में कम क्वालिटी, असल में हाई क्वालिटी कोयला बाहर

4. अवैध वसूली

  • प्रति ट्रक 4000 से 5200 रुपये तक वसूली के आरोप
  • लोडिंग और क्वालिटी के नाम पर पैसा लिया जा रहा है

एक खदान नहीं, पूरा नेटवर्क

यह मामला केवल राजनगर तक सीमित नहीं है। आपकी दी गई जानकारी और स्थानीय सूत्रों के अनुसार:

  • राजनगर
  • हल्दीबाड़ी
  • कुरजा
  • बिजुरी

इन सभी खदानों में एक जैसे पैटर्न पर यह खेल चलने की बात सामने आ रही है।

यह दर्शाता है कि यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क हो सकता है।

कम्पनी और सरकार को करोड़ों का नुकसान

इस कथित घोटाले से:

  • सरकारी राजस्व को भारी नुकसान
  • कंपनियों को कम गुणवत्ता का कोयला
  • बाजार में असंतुलन

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है।

जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि:

  • क्या यह सब बिना अधिकारियों की जानकारी के संभव है?
  • क्या एरिया सेल्स मैनेजर और अन्य अधिकारी इसमें शामिल हैं?
  • क्या स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है?

पेपर कटिंग में भी साफ तौर पर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं

  • कई बार उच्च अधिकारियों को शिकायत
  • ट्रांसपोर्टरों द्वारा विरोध
  • लिखित और मौखिक शिकायतें

लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।


📸 अब जुटाए जा रहे ठोस सबूत

मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है।

  • वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है।
  • 300 से ज्यादा फोटो ली गई हैं।
  • पूरी प्रक्रिया को डॉक्यूमेंट किया जा रहा है।

📨 दिल्ली तक जाएगी गूंज

सूत्रों के मुताबिक:

  • SECL CMD को शिकायत
  • प्रधानमंत्री , कोयला मंत्रालय और दिल्ली विजिलेंस को भी भेजी जाएगी रिपोर्ट
  • उच्च स्तरीय जांच की मांग

यदि यह शिकायत दर्ज होती है, तो मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच सकता है।

सिस्टम पर बड़े सवाल

  1. एक ही बंकर से सीधे लोडिंग क्यों नहीं?
  2. छन्ना जाली का उपयोग क्यों?
  3. लेबर से छंटाई क्यों करवाई जा रही है?
  4. क्या यह संगठित भ्रष्टाचार है?

नियम-कानून क्यों फेल?

  • निगरानी तंत्र कमजोर
  • अधिकारियों की निष्क्रियता
  • शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव

खनन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि:

  • ऐसी प्रक्रिया बिना मिलीभगत के संभव नहीं
  • तकनीकी सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है
  • पारदर्शिता की कमी है

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस पर है:

  • क्या जांच शुरू होगी?
  • क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या सिस्टम में सुधार होगा?

हसदेव एरिया फैले इस कथित कोयला घोटाले ने पूरे SECL सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेपर कटिंग, स्थानीय आरोप और अब जुटाए जा रहे सबूत — यह सब संकेत दे रहे हैं कि मामला बड़ा और गंभीर हो सकता है।

यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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