March 24, 2026 4:17 pm

राजनगर में कोल ट्रांसपोर्टिंग पर विवाद गहराया: लिफ्टरों की मनमानी के आरोप, मोटर मालिकों में आक्रोश

अनूपपुर/राजनगर/अब्दुल सलाम क़ादरी
कोल ट्रांसपोर्टिंग को लेकर राजनगर क्षेत्र में एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। मोटर मालिकों ने आरोप लगाया है कि लिफ्टरों की मनमानी और तानाशाही के चलते उनका शोषण चरम पर पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने हुए समझौते के बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

मोटर मालिकों के अनुसार, बीते अक्टूबर माह में डोला नेशनल हाईवे पर संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद एसडीएम प्रतिनिधि, तहसीलदार, थाना प्रभारी रामनगर और क्षेत्रीय नेताओं की मौजूदगी में सामूहिक समझौता हुआ था। समझौते के दौरान लिफ्टरों द्वारा शपथ पत्र देकर सभी मोटर मालिकों को समान अवसर देने और पारदर्शिता बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था।

लेकिन कुछ ही महीनों में स्थिति फिर से पहले जैसी हो गई। आरोप है कि वी एस स्पंज रायगढ़ से जुड़े ट्रांसपोर्टर विष्णु शर्मा और लिफ्टर आकाश शुक्ला द्वारा चुनिंदा लोगों की गाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि बाकी मोटर मालिकों की गाड़ियों को काम से रोका जा रहा है।

मोटर मालिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि “ROM” के नाम पर नियमों के विपरीत कोयला परिवहन कर “स्टीम लोडिंग” की जा रही है, जिससे SECL कंपनी को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। विरोध करने वाले मोटर मालिकों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनकी गाड़ियों को खड़ा करवा दिया जाता है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वी एस स्पंज के ट्रांसपोर्टर विष्णु शर्मा की मनमानी से यह प्रतीत होता है कि उन्हें यूनियन अध्यक्ष और क्षेत्रीय नेताओं का गुप्त रूप से समर्थन प्राप्त है, जिसके कारण बार-बार शिकायत और लिखित आश्वासन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

मोटर मालिकों का कहना है कि समझौते की प्रति भी सार्वजनिक नहीं की गई। इसे यूनियन के रजिस्टर में दर्ज कर गोपनीय रखा गया, जबकि सभी संबंधित पक्षों को इसकी कॉपी दी जानी चाहिए थी और पारदर्शिता के लिए इसे सार्वजनिक माध्यमों, जैसे व्हाट्सएप ग्रुप, में साझा किया जाना चाहिए था।

पीड़ित मोटर मालिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और मोटर मालिकों को कब तक न्याय मिल पाता है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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