इकबाल हक-मेनेजिंग एडिटर(बीबीसी लाईव)
बिलासपुर। हज़रत अली की शहादत के अवसर पर बिलासपुर में सामाजिक और धार्मिक एकता का संदेश देते हुए चिश्तिया रंग कमेटी के बैनर तले एक दिवसीय सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हाजी इकबाल हक़ की अगुवाई में किया गया, जिसमें शहर की सभी मस्जिदों के इमामों, मुतवल्लियों और समाज के गणमान्य लोगों का सम्मान किया गया.

इस अवसर पर शहर बिलासपुर के सभी मस्जिदों के इमामों और मुतवल्लियों को फूलों के हार एवं चिश्तिया शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित उलेमा-ए-कराम ने हज़रत अली की शहादत को इस्लाम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए उनके जीवन, त्याग और इंसाफ की मिसाल पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में इमामों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए रमजान के अंतिम दिनों की इबादत, शब-ए-क़द्र की अहमियत और आने वाली ईद की नमाज़ के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि ईदगाह मुस्लिम समाज का असली स्थान है, इसलिए अधिक से अधिक संख्या में इकट्ठा होकर ईदगाह में नमाज़ अदा करनी चाहिए। इससे भाईचारा, एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना मजबूत होती है।
उलेमा ने अपने संबोधन में कहा कि हज़रत अली का जीवन इंसाफ, सत्य और इंसानियत का संदेश देता है। उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में शांति, भाईचारा और आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इसी संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से चिश्तिया रंग कमेटी द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उलेमा और समाज के लोगों ने मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की।
इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। साथ ही चिश्तिया रंग कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया।






















