March 7, 2026 1:31 pm

धमतरी वन मण्डल में महाघोटाला! 2020 से 2025 के बीच खरीद में करोड़ों की बंदरबांट, कैम्पा जैसी योजनाओं में खुली लूट!

अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

धमतरी, छत्तीसगढ़ — पिछले कुछ वर्षों में धमतरी वन मण्डल और समग्र छत्तीसगढ़ वन विभाग से जुड़ी सरकारी खरीदी प्रक्रियाओं तथा योजनाओं में कथित आर्थिक अनियमितताओं और घोटालों की गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों तथा कुछ मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई गई है, जिससे सार्वजनिक धन और योजनाओं पर यथासंभव पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है।

घोटाला – खरीद सामग्रियों और टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताएं

पिछले वर्षों में वन विभाग की टेंडर प्रक्रिया और वस्तुओं के क्रय में पारदर्शिता की कमी को लेकर राज्य स्तर पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विधानसभा सत्रों में विपक्षी दल द्वारा यह आरोप लगाया गया कि धमतरी सहित अन्य वन मण्डलों में सीमेंट, रेत, गिट्टी, मोबाइल-संचार उपकरण, जीपीएस डिवाइस, ट्रैप कैमरा आदि सामग्री की खरीदी में अनियमितता, नियमों का उल्लंघन और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई। इन आरोपों के अनुसार कई टेंडरों में उल्लेखनीय त्रुटियाँ और अनुचित निर्णय दर्ज किए गए, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग संभव हुआ।

कुछ मामलों में उच्चस्तरीय अधिकारियों समेत वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा डॉक्यूमेंटेशन और प्रक्रिया में छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए गए हैं, हालांकि इन प्रकरणों की विस्तृत जांच और वैधानिक कार्रवाई जारी है।

तत्कालीन DFO के खिलाफ शिकायतें

धमतरी वन मण्डल के कार्यालय और अन्य जिलों में वन विभाग भ्रष्टाचार और क्रय प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर बार-बार स्थानीय मीडिया और सामाजिक मंचों पर मामले उठते रहे हैं। इन रिपोर्टों में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि विभागीय प्रक्रियाओं में कठोर अनुशासनहीनता और संभावित लाभार्थी पक्षपात जैसी शंकाएं हैं। जांच एजेंसियों, प्रशासन और राज्य सरकार से आगे की कार्रवाई तथा स्वतंत्र जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

केंद्रीय और राज्य स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार जांच दौर

धमतरी के आरोपों के अलावा डीएमएफ (District Mineral Foundation) और अन्य सरकारी विभागों में बड़े स्तर पर फंड और टेंडर घोटाले की छानबीन चल रही है। छत्तीसगढ़ में DMF फंड से जुड़े कई मामले ईओडब्ल्यू तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में हैं, जिसमें आरोप है कि अनियमित टेंडर, फर्जी बिल, कमीशन तथा फंड का दुरुपयोग हुआ है। इन मामलों की जांच राज्य से परे राष्ट्रीय एजेंसियों तक पहुंच चुकी है।

इन डीएमएफ स्कैम के प्रकरणों में कई स्थानों पर डॉक्यूमेंट्स, बैंक स्टेटमेंट्स और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं और आरोपी व्यवसायियों व अधिकारियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का क्रम जारी है।

सार्वजनिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वतंत्र जांच, पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया, और सख्त जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ऐसे घोटालों को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता।

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा इस प्रकार के आरोपों पर कम्प्लायंस और सुधार उपायों की घोषणा की गई है, लेकिन विस्तृत पड़ताल और कोर्ट द्वारा पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।

धमतरी वन मण्डल और वन विभाग से जुड़े 2020–2025 तक के खरीद तथा योजना-आधारित घोटाले के आरोपों ने सार्वजनिक धन और शासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इन आरोपों में शामिल हैं:

  • खरीद टेंडरों में अनियमितता एवं नियमों का उल्लंघन
  • विभागीय अधिकारी और कर्मचारी स्तर पर शंका जनक फैसलों की आशंका
  • इसी प्रकार बड़े-बड़े फंड्स से जुड़े घोटालों की ईओडब्ल्यू/ED जांच और दस्तावेजी सबूत का संकलन

इन प्रकरणों की विस्तृत निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है ताकि जनता के धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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