March 8, 2026 11:55 am

इको-सेंसिटिव जोन के नियमों का उल्लंघन? बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास बना कैलाश वॉटर पार्क सवालों के घेरे में

BBC LIVE NEWS
ब्यूरो रिपोर्ट: अब्दुल सलाम कादरी

उमरिया। विश्व प्रसिद्ध Bandhavgarh Tiger Reserve के खितौली कोर क्षेत्र के नजदीक स्थित Kailash Water Eco Park इन दिनों विवादों में घिर गया है। बताया जा रहा है कि यह वॉटर पार्क इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह पार्क टाइगर रिजर्व के खितौली कोर क्षेत्र से महज 15 से 20 मीटर दूरी पर स्थित है। जबकि भारत सरकार के Ministry of Environment, Forest and Climate Change द्वारा 13 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना के मुताबिक किसी भी संरक्षित क्षेत्र के 1 किलोमीटर के दायरे में नए वाणिज्यिक निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद यहां पक्की बाउंड्री वॉल और अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं, जिससे नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार 14 अगस्त 2025 को भोपाल से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा जारी प्रतिवेदन में इस निर्माण को अवैध बताया गया था और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि रिजर्व के उप-संचालक को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि इस तरह के मामलों को पहले इको-सेंसिटिव जोन मॉनिटरिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर मामला ठंडे बस्ते में पड़ता नजर आया और कुछ समय बाद यह पार्क फिर से संचालित होने लगा। इससे स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है।

पर्यावरण को खतरे की आशंका

आरोप है कि वॉटर पार्क से निकलने वाला क्लोरीनयुक्त पानी बिना किसी प्रभावी जल उपचार संयंत्र (Water Treatment Plant) के सीधे जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत प्रदूषित होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वन्यजीवों, विशेषकर बाघों और अन्य जंगली प्राणियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

इसके अलावा पार्क में होने वाले तेज शोर-शराबे और गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में भी बाधा पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे जंगली जानवरों के मानव बस्तियों की ओर भटकने का खतरा बढ़ सकता है, जो ग्रामीणों और पर्यटकों दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश

Mahaman village, Umaria के पास स्थित इस वॉटर पार्क को लेकर वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जहां छोटे-छोटे उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई होती है, वहीं करोड़ों की लागत से बने इस वॉटर पार्क पर अब तक सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह वॉटर पार्क प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में संचालित हो रहा है, जिसके कारण कार्रवाई में देरी हो रही है।

संरक्षण पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पारिस्थितिकी और प्राकृतिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और वन विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या इको-सेंसिटिव जोन के नियमों का पालन सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।

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Author: BBC LIVE

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