नई दिल्ली
किकबाक्सिंग की शुरुआत 1960 के दशक में दो देशों के बीच प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में हुई थी, लेकिन आज यह दुनिया के सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रहे मार्शल आर्ट्स खेलों में शामिल हो चुका है। भारत समेत कई देशों में इस खेल का रोमांच लगातार बढ़ रहा है।
जापान की के-1 शैली और अमेरिका के फुल-कांटैक्ट फाइटिंग प्रारूप ने किकबाक्सिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान समय में विश्व किकबाक्सिंग संगठन संघ (वाको) से 129 से अधिक देश जुड़े हुए हैं और लाखों खिलाड़ी इसे पेशेवर करियर व फिटनेस के रूप में अपना रहे हैं।
जल्द केएसएल शुरू होगा
किकबाक्सिंग को ओलिंपिक खेलों में शामिल कराने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं। भारत में इस खेल का संचालन करने वाली संस्था वाको इंडिया किकबाक्सिंग फेडरेशन देश में किकबाक्सिंग सुपर लीग (केएसएल) के जरिये इस खेल को बढ़ावा देना चाहता है। भारत में जल्द ही केएसएल को शुरू करने की तैयारी चल रही है। अभी इसकी आधिकारिक तिथि घोषित नहीं हुई है।
वाको इंडिया किकबाक्सिंग फेडरेशन के अध्यक्ष संतोष कुमार अग्रवाल ने कहा कि केएसएल का मुख्य उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों को एक बड़ा पेशेवर मंच उपलब्ध कराना है। हमारा सपना है कि देश का हर प्रतिभाशाली किकबाक्सिंग का स्टार बने। उसे वही सम्मान और पहचान मिले जो दूसरे बड़े खेलों के खिलाड़ियों को मिला है।
युवाओं के लिए मौका
केएसएल के जरिये देशभर के युवा और ग्रासरूट स्तर के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। जब भारतीय खिलाड़ी विदेश के शीर्ष खिलाड़ियों के विरुद्ध मुकाबला करेंगे तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और खेल के प्रति आकर्षण भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को जितने अधिक प्रशिक्षण शिविर और प्रतियोगिताएं मिलेंगी, उनके प्रदर्शन में उतना ही सुधार आएगा। राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर, इंडिया ओपन इंटरनेशनल किकबाक्सिंग कप और केएसएल जैसे आयोजन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
किकबॉक्सिंग को पहचान दिलाना आसान नहीं था
उन्होंने कहा कि जब वर्ष 1998 में हरियाणा में किकबाक्सिंग की शुरुआत की गई थी, तब सबसे बड़ी चुनौती लोगों को इस नए खेल के प्रति जागरूक करना और उनका भरोसा जीतना था। फुटबॉल, हॉकी और बैडमिंटन जैसे खेल पहले से स्थापित थे और उनका ढांचा काफी मजबूत था, लेकिन एक नए खेल को पहचान दिलाना आसान नहीं था।
उन्होंने कहा कि उस समय बच्चों और अभिभावकों को यह समझाना जरूरी था कि किकबाक्सिंग केवल मुकाबले का खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य बनाने का माध्यम भी है।






















