महासमुंद। अब्दुल सलाम क़ादरी। 9424257566
छत्तीसगढ़ के महासमुंद वन मण्डल में फर्जी मजदूरी भुगतान, कागजी वृक्षारोपण और शासकीय राशि के कथित बंदरबांट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलकर वर्ष 2025-26 में विभिन्न योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि का दुरुपयोग किया। मामले में SDO, DFO और संबंधित रेंज अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों और विभागीय जानकारों के अनुसार, मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल तैयार किए गए, कई ऐसे लोगों के नाम से भुगतान दर्शाया गया जिन्होंने कभी कार्य ही नहीं किया। आरोप यह भी है कि विभागीय रिकॉर्ड में “प्रमाणक” तैयार कर कार्य पूर्ण दिखाया गया और सरकारी राशि निकाल ली गई। मजदूरी भुगतान, पौधरोपण, गड्ढा खुदाई, पौध संरक्षण और अन्य वन कार्यों में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सबसे अधिक सवाल महासमुंद रेंज में किए गए वृक्षारोपण कार्यों को लेकर खड़े हो रहे हैं। विभागीय दस्तावेजों में हजारों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी स्थिति रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। कई स्थानों पर पौधे गायब हैं, जबकि कहीं पौधों की संख्या बेहद कम बताई जा रही है। ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि कागजों में हरियाली दिखाकर सरकारी राशि का खेल किया गया।
मामले को लेकर जब प्रदेश के वन मंत्री से चर्चा की गई तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराए जाने की बात कही है। मंत्री के बयान के बाद अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
वन विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस राशि के कथित गबन मामले में ACB और EOW की कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां करोड़ों रुपये के दुरुपयोग के आरोप में वन विभाग के अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी और बड़ी मात्रा में नकदी व दस्तावेज बरामद किए गए थे।
इसी प्रकार देश के अन्य राज्यों में भी वृक्षारोपण और मजदूरी भुगतान से जुड़े वन विभाग के घोटाले सामने आ चुके हैं। ओडिशा में वृक्षारोपण फंड में कथित गड़बड़ी के मामले में कई वन अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी, जहां जांच में फर्जी मजदूरों के नाम पर खाते खोलकर राशि निकालने के आरोप सामने आए थे।
महासमुंद मामले में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि वर्ष 2025-26 में वन मण्डल के अंतर्गत खर्च किए गए “एक-एक पैसे” की स्वतंत्र जांच कराई जाए। मांग की जा रही है कि मजदूरी भुगतान के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मस्टर रोल, वृक्षारोपण स्थलों की वास्तविक स्थिति, खरीदी गई सामग्रियों की गुणवत्ता और विभागीय स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर सरकारी धन की लूट का यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और जांच एजेंसियां इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करती हैं और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कठोर कदम उठाया जाता है।






















