May 14, 2026 12:49 pm

यूनिफॉर्म योजना में बड़ा खेल! फर्जी GST बिलों पर कोल इंडिया सख्त, झारखंड सहित SECL के भी हर एरिया में मचा हड़कंप!

  • यूनिफॉर्म योजना में “फिटिंग” से ज्यादा बिलिंग का खेल!
  • कोल इंडिया में ड्रेस के नाम पर फर्जीवाड़े की चर्चा, एसईसीएल के कई एरिया पर भी उठने लगे सवाल

बोकारो/बिलासपुर।
कोल इंडिया की यूनिफॉर्म योजना इन दिनों सुर्खियों में है। वजह कर्मचारियों की ड्रेस नहीं, बल्कि ड्रेस के नाम पर चल रहे कथित “बिलिंग फैशन शो” हैं। मामला इतना बढ़ गया कि कोल इंडिया प्रबंधन को कर्मचारियों, ट्रस्टों और वेंडरों के लिए सख्त चेतावनी जारी करनी पड़ी।

सर्कुलर में साफ कहा गया है कि फर्जी जीएसटी बिल जमा करना, बढ़ा-चढ़ाकर इनवॉइस बनाना, बिना सामग्री आपूर्ति के एडजस्टमेंट बिल जारी करना और पुराने बिलों का दोबारा इस्तेमाल करना गंभीर अनियमितता माना जाएगा। यानी अब तक जो लोग यूनिफॉर्म योजना को “कम कपड़ा-ज्यादा भुगतान योजना” समझकर चल रहे थे, उनकी सिलाई खुलने लगी है।

कम यूनिफॉर्म, ज्यादा हिसाब!

जानकारी के अनुसार कर्मचारियों को हर वर्ष यूनिफॉर्म खरीद के लिए तय राशि दी जाती है। नियम यह है कि निर्धारित गुणवत्ता और मात्रा में कपड़े खरीदे जाएं। लेकिन कई जगहों पर आरोप हैं कि कम यूनिफॉर्म खरीदकर ज्यादा राशि के बिल लगाए गए।

कुछ मामलों में तो ऐसा भी बताया जा रहा है कि कपड़े की गुणवत्ता इतनी कमजोर थी कि यूनिफॉर्म से ज्यादा मजबूत उसका बिल निकला। वहीं कागजों में ऐसे-ऐसे इनवॉइस तैयार हुए मानो कर्मचारियों को साधारण ड्रेस नहीं बल्कि किसी अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड की डिजाइनर यूनिफॉर्म दी गई हो।

“अदृश्य यूनिफॉर्म” का खेल!

शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कुछ जगह बिना वास्तविक सप्लाई के ही बिल जारी कर दिए गए। यानी कपड़ा आया या नहीं, यह बाद की बात रही, लेकिन भुगतान का रास्ता पहले से प्रेस करके रखा गया था।

व्यंग्य यह है कि मजदूर खदान में पसीना बहा रहे हैं और कुछ लोग फाइलों में “सिलाई-कढ़ाई” कर रहे हैं।

एसईसीएल के एरिया में भी चर्चा तेज

सूत्रों की मानें तो ऐसा खेल केवल एक-दो जगह तक सीमित नहीं है। एसईसीएल के कई एरिया में भी यूनिफॉर्म खरीद को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर हर साल ड्रेस योजना में खर्च का आंकड़ा बढ़ता कैसे जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल बने रहते हैं।

कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई एरिया में “यूनिफॉर्म से ज्यादा यूनिफॉर्म के बिल” निकल सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी विशेष एरिया का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन कोल इंडिया मुख्यालय की सख्ती के बाद कई विभागों में बेचैनी जरूर बढ़ गई है।

अब ऑडिट की नजर और कार्रवाई की कैंची

कोल इंडिया ने स्पष्ट किया है कि कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों को यूनिफॉर्म की भौतिक जांच, जीएसटी पोर्टल से सत्यापन, रिकॉर्ड ऑडिट और वित्तीय निरीक्षण का पूरा अधिकार है। भविष्य में किसी भी गड़बड़ी पर बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई की जा सकती है।

फर्जी बिल लगाने वाले कर्मचारियों, बिना वास्तविक बिक्री के इनवॉइस जारी करने वाले वेंडरों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी शिकंजा भी कस सकता है।

सवाल वही…

कोयला कंपनियों में यूनिफॉर्म योजना कर्मचारियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब यह योजना कई जगह “कपड़े से ज्यादा कागज” पैदा करती दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यूनिफॉर्म की सिलाई हो रही है या सरकारी पैसों की कटिंग?

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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