April 29, 2026 4:45 pm

सूचना मांगने पर बहाना! सूरजपुर वन मण्डल ने RTI में जानकारी देने से किया इनकार, सवालों के घेरे में जन सूचना अधिकारी

सूरजपुर, छत्तीसगढ़। सूरजपुर वनमंडल कार्यालय से एक ऐसा पत्र सामने आया है जिसने सूचना के अधिकार कानून की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवेदक अब्दुल सलाम कादरी द्वारा मांगी गई जानकारी पर जन सूचना अधिकारी ने सीधे तौर पर जानकारी देने से मना कर दिया। मामला मार्च 2025 में रेंज कार्यालय में हुए 11 लाख 96 हजार 245 रुपये के खर्च से जुड़ा है, जिसके बिल वाउचर और भुगतान संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे।

अब सवाल यह है कि जब जनता के टैक्स का पैसा खर्च हुआ है, तो उसका हिसाब जनता को क्यों नहीं दिया जा रहा? आखिर किस बात का डर है? क्या वन विभाग कुछ छिपाना चाहता है?

कार्यालय वनमंडलाधिकारी, सूरजपुर वनमंडल सूरजपुर द्वारा जारी पत्र क्रमांक सू./अ./100/2026/2295 दिनांक 21/04/2026 में लिखा गया है कि अब्दुल सलाम कादरी निवासी खोंगापानी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन आईडी 220260405002296, दिनांक 05.04.2026 को कार्यालय में प्राप्त हुआ।

आवेदन में मांग की गई थी कि संलग्न सामान्य लेखा गोशवारा दस्तावेज के अनुसार मार्च 2025 में रेंज में खर्च किए गए 11 लाख 96 हजार 245 रुपये के बिल वाउचर की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध कराई जाए।

लेकिन जन सूचना अधिकारी ने जवाब में कहा कि मांगी गई सूचना में तृतीय पक्ष की जानकारी शामिल है, क्योंकि बिल वाउचर में श्रमिकों के बैंक खाता क्रमांक दर्ज होते हैं। इसलिए यह किसी व्यक्ति की निजी जानकारी है और केवल व्यापक लोकहित या लोक कल्याण से संबंधित होने पर ही दी जा सकती है।

यानी विभाग ने पूरा मामला निजी जानकारी बताकर पल्ला झाड़ लिया।

पत्र में छत्तीसगढ़ शासन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग मंत्रालय नया रायपुर के पत्र क्रमांक 186/104/2017/56/इस्पो, दिनांक 11.04.2010 का हवाला देते हुए कहा गया है कि आधार नंबर, बैंक खाता, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, जाति आदि संवेदनशील जानकारियां हैं।

साथ ही यह भी लिखा गया कि भुगतान सूची में मजदूरों/श्रमिकों के आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर एवं हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान जैसी निजी जानकारी दर्ज होती है, इसलिए यह गोपनीय श्रेणी में आती है।

जन सूचना अधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के आदेश शिकायत/अपील प्र.क्र./C/1181/2017, दिनांक 07/12/2020 का भी हवाला दिया, जिसमें व्यक्ति का नाम, गांव का नाम, अकाउंट नंबर तथा IFSC कोड जैसी जानकारी को निजी जानकारी माना गया है।

इसी आधार पर विभाग ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 और भाग 4 की कंडिका 13 के अनुसार मूल सूचना से यह जानकारी अलग करना संभव नहीं है, इसलिए सूचना प्रदान नहीं की जा सकती।

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या बिल वाउचर में निजी जानकारी छिपाकर बाकी दस्तावेज नहीं दिए जा सकते थे? क्या भुगतान राशि, काम का नाम, खर्च का मद, भुगतान तिथि, सप्लायर का नाम जैसी जानकारी भी गोपनीय है?

जन सूचना अधिकारी ने कानून का इस्तेमाल पारदर्शिता के लिए किया या जानकारी दबाने के लिए?
अगर सब कुछ नियम से हुआ है तो फिर बिल वाउचर दिखाने या देने में दिक्कत क्या है?

सूरजपुर वन विभाग का यह पत्र कई सवाल छोड़ गया है। जनता जानना चाहती है कि 11 लाख 96 हजार 245 रुपये आखिर कहां खर्च हुए, किसे दिए गए और किस काम में लगे। अब देखना होगा कि आवेदक इस मामले को प्रथम अपील या राज्य सूचना आयोग तक ले जाते हैं या नहीं।

हर वन मण्डल के हर घोटाले की एक एक परत खोली जाएगी-पढ़ते और देखते रहे सिर्फ “बीबीसी लाईव” -प्रधान संपादक-अब्दुल सलाम क़ादरी-9424257566

 

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

विज्ञापन