रिपोर्ट-सुनीता चौहन-पत्रकार एवं एडवोकेट(भोपाल)
भोपाल/उमरिया। उमरिया वन मण्डल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल सलाम क़ादरी द्वारा वन विभाग के कार्यों में कथित घोटालों की जांच की मांग और उसके बाद शिकायतकर्ता पत्रकार को कथित रूप से धमकियां दिए जाने का मामला अब प्रदेशभर के पत्रकार संगठनों का मुद्दा बन गया है।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पत्रकार संघ सहित भोपाल के विभिन्न पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा उमरिया वन मण्डल के पिछले पांच वर्षों के सभी विकास कार्यों, भुगतान, निविदाओं और वित्तीय अभिलेखों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने के बजाय उसे डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है, तो यह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और सूचना के अधिकार की भावना पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।
आरटीआई से शुरू हुआ मामला, जांच की मांग तक पहुंची बात
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल सलाम क़ादरी ने उमरिया वन मण्डल में पिछले पांच वर्षों के विभिन्न कार्यों की जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी थी। इसी दौरान विभिन्न स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने पर मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी गई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।
आरोप है कि समय पर जांच शुरू होने के बजाय शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया तथा वन मण्डल के कुछ अधिकारियों और उनके कथित नुमाइंदों द्वारा पत्रकार को धमकियां दी जाने लगीं। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया तथा मुख्यमंत्री को अलग से ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की गई।
एक माह का अल्टीमेटम, नहीं हुई जांच तो होगा बड़ा आंदोलन
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भोपाल में पीसीसीएफ कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष तथा उमरिया और शहडोल में चरणबद्ध प्रदर्शन, धरना और जनआंदोलन किया जाएगा। साथ ही जबलपुर हाईकोर्ट में भी मामला प्रस्तुत किया जाएगा
संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
“जनता के टैक्स की रक्षा हमारा दायित्व”
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल सलाम क़ादरी का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि जनता के टैक्स से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। यदि कहीं भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता के पैसे की बर्बादी रोकना और सरकारी तंत्र में जवाबदेही तय कराना पत्रकारिता का मूल दायित्व है, इसलिए भविष्य में भी ऐसे मामलों का खुलासा जारी रहेगा।
अब सबकी निगाहें सरकार के फैसले पर
उमरिया वन मण्डल से उठी यह शिकायत अब राजधानी भोपाल तक पहुंच चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश देती है या नहीं। फिलहाल पत्रकार संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।





















