भोपाल। उमरिया। अब्दुल सलाम क़ादरी
- अवैध उत्खनन के आरोपों के बीच जिला प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में
उमरिया। जिले के नदी-नाले, वन क्षेत्र और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रेत माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन और खनिज विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल दिखाई दे रहे हैं।
क्षेत्र में चर्चा है कि रेत का अवैध कारोबार लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहन रेत परिवहन करते देखे जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता नजर आती है। इससे प्रशासनिक निगरानी और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद कैसे चल रहा रेत का कारोबार?
मानसून अवधि में रेत उत्खनन पर विभिन्न पर्यावरणीय नियमों और दिशानिर्देशों के तहत प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इसके बावजूद यदि नदी-नालों से रेत निकासी और बड़े पैमाने पर भंडारण की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे हैं।
– अवैध रेत परिवहन की शिकायतों पर कितनी कार्रवाई हुई?
– जिले में संचालित रेत भंडारण स्थलों का सत्यापन कब हुआ?
– जब्ती और चालानी कार्रवाई के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
– वन क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में खनन संबंधी शिकायतों की जांच की स्थिति क्या है?
– यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो प्रशासन पूरी जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है?
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा संदेह
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देने से जनता के बीच अविश्वास बढ़ रहा है। लोगों का मानना है कि जब तक जिला प्रशासन और खनिज विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य सार्वजनिक नहीं करेंगे, तब तक रेत कारोबार को लेकर उठ रहे सवाल और संदेह खत्म नहीं होंगे।
निष्पक्ष जांच की मांग
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले सभी जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
उमरिया की जनता अब यह जानना चाहती है कि जिले की नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा होगी या फिर रेत माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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