June 25, 2026 9:27 pm

हज आम मुसलमान की पहुंच से दूर, अब उमराह की ओर बढ़ रहा रुझान

अब्दुल सलाम क़ादरी

  • बढ़ती लागत, सीमित कोटा और लंबी प्रक्रिया के कारण हज का सपना कठिन, उमराह बन रहा विकल्प

विशेष रिपोर्ट

भारत सहित दुनिया भर के मुसलमानों के लिए हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण इबादत है। हर मुसलमान की यह तमन्ना होती है कि वह जीवन में कम से कम एक बार हज की अदायगी करे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हज यात्रा की बढ़ती लागत, सीमित कोटा, यात्रा संबंधी खर्चों में वृद्धि और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण यह इबादत आम और मध्यम वर्गीय मुसलमानों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती दिखाई दे रही है।

पहले जहां सामान्य परिवार वर्षों की बचत करके हज यात्रा का सपना पूरा कर लेते थे, वहीं अब लाखों रुपये के खर्च ने कई परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हवाई किराए, आवास, परिवहन, टैक्स और अन्य व्यवस्थाओं में लगातार बढ़ोतरी के चलते हज यात्रा का कुल खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

उमराह की ओर बढ़ता रुझान

हज के मुकाबले उमराह अपेक्षाकृत सरल और वर्ष के अधिकांश समय में किया जा सकता है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में मुसलमान उमराह को प्राथमिकता देने लगे हैं। ट्रैवल एजेंसियों और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उमराह यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है।

कई लोगों का मानना है कि जब हज का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा है, तब कम खर्च और सुविधाजनक समय में उमराह करना एक व्यवहारिक विकल्प बन गया है। विशेष रूप से युवा वर्ग और मध्यम आय वाले परिवारों में उमराह को लेकर रुचि बढ़ी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

धार्मिक जानकारों का कहना है कि हज और उमराह दोनों का अपना अलग महत्व है। हज एक फर्ज इबादत है, जबकि उमराह नफ्ल इबादत है। इसलिए आर्थिक परिस्थितियों के कारण यदि कोई व्यक्ति हज नहीं कर पा रहा है तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। इस्लाम में हज केवल उसी व्यक्ति पर फर्ज है जो शारीरिक और आर्थिक रूप से इसकी क्षमता रखता हो।

मध्यम वर्ग की बढ़ती चिंता

कई परिवारों का कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों के बीच हज के लिए बड़ी राशि जुटाना पहले से अधिक कठिन हो गया है। ऐसे में वे उमराह को अपनी धार्मिक इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम मान रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि भविष्य में हज यात्रा की लागत को नियंत्रित करने और सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयास किए जाएं, तो आम मुसलमानों के लिए हज का सपना फिर से आसान हो सकता है।

धार्मिक भावना बनी हुई है मजबूत

हालांकि आर्थिक चुनौतियों ने हज यात्रा को कठिन बनाया है, लेकिन मुसलमानों की धार्मिक आस्था और मक्का-मदीना जाने की इच्छा आज भी उतनी ही मजबूत है। यही कारण है कि जहां एक ओर लोग हज के लिए बचत जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग उमराह के माध्यम से हरमैन शरीफैन की हाजिरी का सौभाग्य प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

बढ़ती लागत और आर्थिक दबावों के बीच हज आम मुसलमान के लिए पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे हालात में उमराह एक व्यवहारिक और लोकप्रिय विकल्प के रूप में उभर रहा है। हालांकि मुसलमानों के दिलों में हज की अहमियत आज भी सर्वोपरि है और हर सक्षम व्यक्ति की ख्वाहिश रहती है कि उसे एक दिन इस महान इबादत की अदायगी का अवसर अवश्य मिले।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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