- हजारों युवाओं के सपनों से खिलवाड़, शिकायतों के बावजूद कई फर्जी एजेंट खुलेआम सक्रिय.
दिल्ली। मुंबई। अब्दुल सलाम क़ादरी
देशभर में विदेश में नौकरी दिलाने और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पुलिस समय-समय पर कार्रवाई कर कुछ एजेंटों को गिरफ्तार करती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब हर साल हजारों लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो आखिर अवैध एजेंटों का नेटवर्क खत्म क्यों नहीं हो पा रहा?
विदेश भेजने के नाम पर कई एजेंट बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूल लेते हैं। उन्हें नकली वीजा, फर्जी जॉब ऑफर लेटर और झूठे अनुबंध थमा दिए जाते हैं। कई मामलों में पीड़ित विदेश पहुंचने से पहले ही ठगी का शिकार हो जाते हैं, जबकि कुछ लोग विदेश जाकर भी मुश्किलों में फंस जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई अक्सर शिकायत दर्ज होने के बाद शुरू होती है। जब तक पुलिस जांच पूरी करती है, कई फर्जी एजेंट अपना कार्यालय बंद कर किसी दूसरे नाम से फिर कारोबार शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि ठगी का यह नेटवर्क लगातार फैलता रहता है।
कई राज्यों में पुलिस और जांच एजेंसियों ने अवैध एजेंटों के खिलाफ अभियान चलाकर गिरफ्तारियां भी की हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या केवल छिटपुट कार्रवाई पर्याप्त है, या पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्यों और केंद्र स्तर पर समन्वित अभियान की जरूरत है?
जानकारों का कहना है कि यदि सभी विदेशी रोजगार एजेंसियों का नियमित सत्यापन हो, बिना लाइसेंस काम करने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो और आम लोगों को अधिक जागरूक किया जाए, तो इस तरह की ठगी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
विदेश में नौकरी या पढ़ाई के इच्छुक लोगों को भी सलाह दी जाती है कि वे किसी एजेंट को पैसा देने से पहले उसकी वैधता, सरकारी पंजीकरण और दस्तावेजों की पूरी जांच करें। केवल सोशल मीडिया या बड़े-बड़े विज्ञापनों के आधार पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ठगी के इतने मामले सामने आ रहे हैं, तो अवैध एजेंटों के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और निरंतर कार्रवाई कब होगी?





















