- विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों की ठगी, सैकड़ों मामले दर्ज, फिर भी शहर में अवैध एजेंट सक्रिय।
विस्तृत खबर
विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी इमिग्रेशन एजेंटों का नेटवर्क चंडीगढ़ में लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। हाल के वर्षों में दर्ज मामलों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग ऐसे एजेंटों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं।
चंडीगढ़ पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच इमिग्रेशन धोखाधड़ी के 433 मामले दर्ज हुए, जिनमें लगभग 74 करोड़ रुपये की कथित ठगी सामने आई। इसी अवधि में 232 फर्जी इमिग्रेशन फर्मों की पहचान की गई। पुलिस ने यह भी माना कि कई लोग देर से शिकायत दर्ज कराते हैं, जिससे कार्रवाई में देरी होती है।
पुलिस ने समय-समय पर शहर के विभिन्न सेक्टरों में छापेमारी कर कई अवैध एजेंसियों पर एफआईआर दर्ज की, गिरफ्तारियां कीं और पासपोर्ट, कंप्यूटर तथा अन्य दस्तावेज भी जब्त किए। इसके बावजूद नए नामों से एजेंसियां खुलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
चंडीगढ़ पुलिस ने इमिग्रेशन कंपनियों के लिए पंजीकरण और सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की है तथा नागरिकों से केवल अधिकृत एजेंसियों से ही संपर्क करने की अपील की है।
सबसे बड़ा सवाल
कार्रवाई होने के बावजूद यदि फर्जी एजेंट दोबारा सक्रिय हो जाते हैं, तो क्या केवल छापेमारी काफी है? क्या पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच, अवैध संपत्तियों की पड़ताल और तेज़ न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत है, ताकि विदेश भेजने के नाम पर युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी रोक लग सके?





















