March 5, 2026 10:34 am

RTI का हथियार, वन विभाग पर वार। मनेन्द्रगढ़ में रेंजर–DFO की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार

अब्दुल सलाम क़ादरी। मनेन्द्रगढ़ (छ.ग.) — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) को कमजोर करने और तथ्यों को दबाने के गंभीर आरोपों के बीच मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ताज़ा मामला आरटीआई आवेदन क्रमांक A/249/2025 से जुड़ा है, जिसमें कार्यालय वनमण्डलाधिकारी (सा.), मनेन्द्रगढ़ द्वारा 02.01.2026 को पारित आदेश ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

दस्तावेजों के अनुसार, आवेदक अब्दुल सलाम क़ादरी ने 04.09.2025 को RTI के तहत मनेन्द्रगढ़ कारागार के बगल एवं सामने एंटी डग (AD) बंगला निर्माण कार्य से जुड़े स्वीकृति, भुगतान, माप-पुस्तिका (MB), स्टिमेट, एजेंसी विवरण जैसी बुनियादी जानकारियां मांगी थीं। यह वही जानकारी है, जिसे धारा 4(1)(b) के तहत विभाग को स्वप्रेरणा से सार्वजनिक करना चाहिए था।

 

सूचना देने के बजाय ‘घुमाने’ का खेल?

आरोप है कि आवेदन को नियमों के अनुसार जवाब देने के बजाय क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच टालमटोल की गई। समय-सीमा (धारा 7(1)) के भीतर सूचना न देकर आवेदक को प्रथम अपील के लिए मजबूर किया गया। प्रथम अपील की सुनवाई में भी कथित तौर पर मुद्दे से भटकाकर यह कहा गया कि आवेदन का विषय ‘स्पष्ट नहीं’ है—जबकि मांगी गई जानकारी निर्माण कार्य से संबंधित मानक दस्तावेज थे।

यह सवाल लाज़िमी है कि यदि विषय स्पष्ट नहीं था तो धारा 6(1) के तहत आवेदन स्वीकार क्यों किया गया? और यदि स्पष्ट था, तो सूचना क्यों रोकी गई?

RTI एक्ट की खुली अवहेलना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्रकरण में RTI Act की कई धाराओं की भावना और अक्षर दोनों का उल्लंघन दिखता है:

  • धारा 4(1)(b): निर्माण, खर्च और अनुबंध से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक डोमेन में होने चाहिए।
  • धारा 7(1): 30 दिनों में सूचना देना अनिवार्य।
  • धारा 19(1): प्रथम अपील में निष्पक्ष और तर्कसंगत आदेश अपेक्षित।
  • धारा 19(8): अपीलीय प्राधिकारी को सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश देने का अधिकार।
  • धारा 20: जानबूझकर सूचना रोकने पर दंड का प्रावधान।

आदेश में सूचना देने के बजाय आवेदन को “गुण-दोष के आधार पर निरस्त” करना यह संकेत देता है कि विभाग जवाबदेही से बचने की राह चुन रहा है।

बड़ा सवाल: क्या छुपाया जा रहा है?

स्थानीय जानकारों का कहना है कि निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप पहले भी उठते रहे हैं। ऐसे में RTI के जरिए मांगे गए रिकॉर्ड सामने आते तो भुगतान, माप और स्वीकृति की परतें खुल सकती थीं। इसी आशंका के चलते सूचना को रोके जाने का आरोप लग रहा है।

यदि सब कुछ नियम-कानून के मुताबिक है, तो MB बुक, भुगतान वाउचर और स्वीकृति आदेश सार्वजनिक करने में हिचक क्यों?

सरकार और उच्चाधिकारियों के लिए चेतावनी

RTI लोकतंत्र की रीढ़ है। इसे कमजोर करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ भी। इस मामले में रेंजर और DFO मनेन्द्रगढ़ की भूमिका की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। साथ ही, राज्य सूचना आयोग को धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।

आवेदक को कानून के अनुसार 90 दिनों के भीतर द्वितीय अपील का अधिकार है। अब निगाहें इस पर हैं कि क्या राज्य स्तर पर पारदर्शिता बहाल होगी या फाइलें यूं ही धूल फांकती रहेंगी।

  •  (DFO), मनेन्द्रगढ़
    • RTI Act की धारा 4(1)(b) के तहत सार्वजनिक किए जाने योग्य निर्माण/भुगतान रिकॉर्ड स्वप्रेरणा से सार्वजनिक न करने का आरोप।
    • प्रथम अपील में धारा 19(1) की भावना के विपरीत, सूचना उपलब्ध कराने के बजाय आवेदन को निरस्त करने का आरोप।
  • रेंजर मनेन्द्रगढ़ रामसागर कुर्रे (मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल)
    • निर्माण कार्य से संबंधित MB बुक, स्टिमेट व भुगतान विवरण समय-सीमा में उपलब्ध न कराने का आरोप।
    • RTI आवेदन को “विषय स्पष्ट नहीं” बताकर सूचना से बचने की कोशिश का आरोप।
  • जन सूचना अधिकारी (परिक्षेत्र मनेन्द्रगढ़)
    • धारा 7(1) के तहत 30 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा का पालन न करने का आरोप।
    • आवेदक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाने की प्रक्रिया अपनाने का आरोप।

हाईकोर्ट और राज्य सूचना आयोग एंगल

कानूनी जानकारों के अनुसार, इस प्रकरण में आवेदक के पास निम्न विकल्प खुले हैं:

  • राज्य सूचना आयोग, छत्तीसगढ़
    • RTI Act की धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील।
    • धारा 20 के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों पर ₹25,000 तक का जुर्माना और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा।
  • माननीय उच्च न्यायालय
    • सूचना के अधिकार के मौलिक स्वरूप (अनुच्छेद 19(1)(a)) के उल्लंघन के आधार पर रिट याचिका
    • पारदर्शिता से जुड़े मामलों में पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा सख्त टिप्पणियाँ की जा चुकी हैं, जिससे इस प्रकरण में भी कड़ी निगरानी संभव।
  • RTI से हिला वन विभाग! मनेन्द्रगढ़ में रेंजर–DFO पर गंभीर सवाल
  • सूचना मांगना पड़ा भारी? RTI पर ‘कैंची’ का आरोप
  • काग़ज़ छुपे तो घोटाले का शक! मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल कटघरे में
  • RTI Act कहता है—जानकारी जनता की है, किसी अफसर की नहीं। फिर मनेन्द्रगढ़ वन विभाग क्यों चुप है?
  • MB बुक, भुगतान, स्टिमेट—सब मांगा गया, कुछ नहीं मिला। सवाल वही—क्या छुपाया जा रहा है?
  • RTI पर पर्दा डालना लोकतंत्र पर वार है। अब निगाहें राज्य सूचना आयोग और हाईकोर्ट पर।

यह सिर्फ एक RTI नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की परीक्षा है। यदि सूचना आज नहीं मिली, तो कल सवाल और तेज़ होंगे—और जवाबदेही से भागने वालों को जनता के कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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