नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर की राजनीति कई दिशाओं में चलती है। जो होता है वो दिखता नहीं है और जो दिखता है वो होता नहीं है। यहां पीएम मोदी की रैली में भी जो भीड़ थी वो उनकी अपनी नहीं थी, ये भीड़ का रैला लेकर आए थे राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। मतलब साफ है की पीएम की रैली में सीएम की भीड़ का नजारा दिखाई दिया। हालांकि ये सिर्फ सियासी चर्चा है लेकिन राजनीति पर चटखारे लेने वाले ऐसी चर्चाओं पर मिर्च मसाला लगाए बिना कैसे रहे सकते हैं। हालांकि इसके पीछे सीएम उमर ने एक बड़ा सियासी दांव भी चला है।
जम्मू-कश्मीर में लोग ज्यादातर रैलियों में नहीं आते। रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को लाया जाता रहा है। मगर इस बार नजारा कुछ अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में इस बार सरकारी कर्मचारी नहीं, स्थानीय लोग शामिल हुए थे। वह भी अच्छी संख्या में। इसके पीछे नेशनल कॉन्फ्रेंस के हाथ बताया जा रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गांदरबल में जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन किया। इसके बाद एक जनसभा को संबोधित किया। इस रैली में शामिल होने के लिए स्थानीय लोगों ने कड़ाके की ठंड और दो फीट बर्फबारी की परवाह नहीं की। जम्मू-कश्मीर चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। मगर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस की कांग्रेस से दूरी साफ दिख रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सुर बदल चुके हैं। एक ओर वह कांग्रेस को फटकार रहे हैं। दूसरी ओर पीएम मोदी पर खूब प्यार भी बरसा रहे हैं। हैरानी तो तब हुई, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस को पीएम मोदी की कश्मीर रैली में शामिल होने के लिए लोगों को मोटिवेट करते देखा गया। लेटेस्ट घटनाक्रम से ऐसा लग रहा कि जम्मू-कश्मीर की सियासत में कुछ तो खिचड़ी पक रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी की रैली में अधिक से अधिक स्थानीय लोग शामिल हों, इसके लिए उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पूरी मेनहत की थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने गांव-गांव जाकर लोगों को पीएम मोदी की रैली में शामिल होने के लिए कहा। उनके लिए गाड़ियों तक की व्यवस्था कराई गई। दावा है कि पीएम मोदी की इस रैली में करीब 5 हजार से अधिक स्थानीय लोग शामिल हुए।
मैंने 500 वाहनों का इंतजाम किया: एनसी विधायक
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और कंगन सीट से विधायक मियां मेहर अली के मुताबिक, ‘मैं पिछले तीन दिनों से पीएम की यात्रा की तैयारी कर रहा था। हमने कंगन और गांदरबल विधानसभा क्षेत्रों के दूर-दराज और बर्फ से ढके गांवों से स्थानीय लोगों को लाने के लिए लगभग 500 वाहनों का इंतजाम किया था। लोग यह सुनने के लिए उत्सुक थे कि पीएम के पास क्या कश्मीर के लोगों के लिए क्या-क्या ऑफर हैं। रिपोर्ट में विधायक अली के हवाले से दावा किया गया कि पीएम मोदी की रैली में शामिल होने के लिए किसी भी सरकारी कर्मचारी को निर्देश नहीं दिया गया था। सूत्रों का दावा है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो नागरिक प्रशासन के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल पर तैनात करने की बात कही गई थी। दरअसल, केंद्रीय शासन के दौरान यह एक प्रथा थी कि विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को सुबह-सुबह इकट्ठा होने और कश्मीर में प्रधानमंत्री की रैलियों में शामिल होने का निर्देश दिया जाता था।
उमर अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन के सहयोगी
यहां ध्यान देने वाली बात है कि उमर अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन के सहयोगी हैं। बीते कुछ समय से वह कांग्रेस को लगातार घेर रहे हैं। कांग्रेस जहां जम्मू-कश्मीर चुनाव में धांधली का आरोप लगाई थी। वहीं, उमर अब्दुल्ला ने चुनाव शांतिपूर्वक और बिना धांधली के कराने पर भाजपा सरकार की जमकर तारीफ की। उमर अब्दुल्ला ने कहा, चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शांति से चुनाव हुए। कहीं कोई धांधली और उपद्रव की शिकायत नहीं आई। इसका श्रेय आपको (पीएम मोदी), आपके साथियों और चुनाव आयोग को जाता है। महाराष्ट्र चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने ईवीएम पर सवाल उठाया था। इस पर कांग्रेस को अब्दुल्ला ने खूब सुनाया था। अब्दुल्ला ने कहा था कि जब आपकी जीत होती है तब ऐसा सवाल क्यों नहीं करते। इस पर कांग्रेस बिफर गई थी और कहा था कि सीएम बनने के बाद आप बदल गए हैं।पीएम मोदी की रैली के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस की इस सक्रियता ऐसे वक्त में आई है, जब उमर उब्दुल्ला ने पीएम मोदी की खूब तारीफ की है। अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘दिल और दिल्ली’ के बीच की खाई को पाटने और केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा जल्द ही पूरा करेंगे।
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ये है जम्मू कश्मीर का सियासी दांव: पीएम मोदी की रैली में सीएम उमर अब्दुल्ला की भीड़
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