October 15, 2026 9:28 am

कुंआकोंडा के दुर्गम अंचल में पहली बार समग्र जांच का अनुभव, 62 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग; गर्भवती सहित 4 मरीज तत्काल रेफर

रायपुर

11 किमी की दूरी नहीं बनी बाधा, स्वास्थ्य टीम पहुंची लोहागांव के हर दरवाजे तक

घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और कठिन रास्तों के बीच बसे लोहागांव में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसे की दस्तक बनकर पहुंचीं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बैलाडीला की पहाड़ियों से घिरे विकासखंड कुआकोंडा के इस सुदूर गांव तक पहुंचने के लिए करीब 11 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया। ऐसा सफर, जो सामान्य दिनों में भी आसान नहीं माना जाता।

11 किमी की दूरी नहीं बनी बाधा, स्वास्थ्य टीम पहुंची लोहागांव के हर दरवाजे तक

गांव पहुंचने के बाद टीम ने 62 ग्रामीणों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल रहे, जिनमें कई ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने पहली बार इस तरह की समग्र जांच कराई। मलेरिया और सिकल सेल (हीमोग्लोबिन) की जांच के साथ-साथ मोतियाबिंद और कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की पहचान की गई। गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की गई, वहीं बच्चों का टीकाकरण भी सुनिश्चित किया गया।

जांच के दौरान 4 मरीजों की स्थिति गंभीर पाई गई, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें एक गर्भवती महिला, एक मोतियाबिंद मरीज और दो मलेरिया पॉजिटिव मरीज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय रहते इन मरीजों की पहचान होना आगे चलकर गंभीर जटिलताओं को रोकने में मददगार साबित होगा।

दरअसल, 13 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत पूरे जिले में 76 स्वास्थ्य स्थलों के माध्यम से टीमें गांव-गांव पहुंच रही हैं। इसका उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों में छिपी बीमारियों की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ना है।

लोहागांव जैसे दुर्गम क्षेत्रों में टीम की यह पहुंच इस बात का संकेत है कि अब स्वास्थ्य सेवाएं “इंतजार” नहीं, बल्कि “पहलकदमी” के रूप में सामने आ रही हैं। जहां पहले दूरी और संसाधनों की कमी बड़ी बाधा थी, वहीं अब यही अभियान उन बाधाओं को पार करने की कोशिश करता दिख रहा है।

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Author: Editor

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