October 15, 2026 8:18 am

एमपी में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई तेज, पक्ष और विपक्ष की याचिकाएं अलग करने का आदेश

जबलपुर 

मध्य प्रदेश में  27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सोमवार से तीन दिनों तक लगातार सुनवाई प्रारंभ हुई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने ओबीसी आरक्षण के पक्ष तथा विपक्ष में दायर याचिकाओं को अलग-अलग करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाओं पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी है।

गौरतलब है कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के पक्ष तथा विपक्ष में हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। कुछ याचिकाओं में फॉर्मूला 87:13 को चुनौती देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर आपत्ति की गई थी। पक्ष में दायर की गई याचिकाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग की गई थी।

कोर्ट ने तीन दिनों तक नियमित सुनवाई के निर्देश जारी किए थे
हाईकोर्ट ने कुछ याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद प्रदेश सरकार सहित अन्य पक्षकारों ने सर्वोच्च न्यायालय में इसी मुद्दे पर एसएलपी दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी एसएलपी को सुनवाई के लिए वापस हाईकोर्ट भेज दिया था। हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल से लगातार तीन दिनों तक नियमित सुनवाई के निर्देश जारी किए थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन माह में संबंधित याचिकाओं के निराकरण के निर्देश जारी किए हैं। युगलपीठ को याचिका की सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि ओबीसी आरक्षण के विपक्ष में 70 तथा पक्ष में 30 याचिकाएं दायर की गई हैं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद तर्क प्रस्तुत करने के लिए पक्ष व विपक्ष में दायर याचिकाओं को अलग-अलग करने के आदेश जारी किए हैं।

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Author: Editor

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